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NSUI staged protests across the state demanding the resumption of student union elections, warning of intensifying the agitation if no response was received within seven days.
रायपुर। छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर सोमवार को एनएसयूआई ने प्रदेशभर के शासकीय विश्वविद्यालयों में जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी स्थित रविशंकर विश्वविद्यालय (रविवि), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालयों में कार्यकर्ताओं ने घेराव कर ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि सात दिनों में मांगों का जवाब नहीं मिलने पर आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
प्रत्यक्ष चुनाव की बहाली की पुरानी मांग
राज्य में 2014 से 2016 तक छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली के तहत आयोजित हुए। उस समय अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और महासचिव का चयन मतदान के जरिए होता था। 2017 के बाद पदाधिकारियों का चयन कुलपतियों की अनुशंसा के आधार पर मनोनयन से होने लगा, जिससे छात्र नेताओं में असंतोष बढ़ गया। एनएसयूआई का कहना है कि लंबे समय से छात्रसंघ में प्रत्यक्ष चुनाव बहाल करने की मांग उठ रही है।
रविवि में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपना
रविवि परिसर में सुबह 11 बजे से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। पुलिस ने उन्हें मुख्य गेट पर रोकने की कोशिश की, लेकिन नाराज छात्रों ने धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि यह मांगें शासन और राज्यपाल तक पहुंचाई जाएंगी, जिसके बाद प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से समाप्त हुआ।
छात्र नेताओं का कड़ा रुख
प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, उपाध्यक्ष अमित शर्मा और जिलाध्यक्ष शांतनू झा ने कहा कि सात दिनों में ठोस जवाब नहीं मिलने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। छात्रों ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने तक सड़क से सदन तक आंदोलन जारी रहेगा, क्योंकि इसे राजनीति की पहली सीढ़ी माना जाता है।
कुलपतियों की अनुशंसा पर मनोनयन प्रणाली
छात्रसंघ गठन के लिए वर्ष 2014 में प्रत्यक्ष चुनाव का नियम बनाया गया था, जिसकी अवधि तीन वर्ष थी। 2014, 2015 और 2016 में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पदाधिकारियों का चयन मतदान के जरिए हुआ। नियम की अवधि समाप्त होने के बाद 2017 में यह निर्णय कुलपतियों के विवेक पर छोड़ दिया गया कि वे चुनाव मतदान से कराएँ या मनोनयन के आधार पर छात्रसंघ का गठन करें। इस प्रणाली के तहत मेरिट आधार पर छात्रों को पद देने की व्यवस्था लागू की गई।