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Jaggi Murder Case: Politics heats up after High Court verdict, Satish Jaggi demands death penalty
रायपुर। राम अवतार जग्गी हत्याकांड में हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अदालत द्वारा अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे अधूरा न्याय बताया और फांसी की सजा की मांग की है।
सतीश जग्गी ने कहा कि यह फैसला उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है, लेकिन दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
23 साल के संघर्ष और धमकियों का जिक्र
मीडिया से बातचीत में सतीश जग्गी ने भावुक होते हुए बताया कि पिछले 23 वर्षों में उनके परिवार को कई बार धमकियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि न्याय की लड़ाई के दौरान उन्हें डराने की कोशिश की गई और परिवार को मानसिक दबाव में रखा गया।
पासपोर्ट जब्त करने की मांग
सतीश जग्गी ने अदालत से यह भी अपील की है कि अमित जोगी का पासपोर्ट जब्त किया जाए, ताकि वह देश छोड़कर बाहर न जा सकें। उन्होंने आशंका जताई कि आरोपी विदेश भाग सकता है, इसलिए इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
फैसले के बाद जोगी निवास में सन्नाटा
हाई कोर्ट के फैसले के बाद रायपुर स्थित जोगी निवास में सन्नाटा छा गया है। जानकारी के अनुसार अमित जोगी इस समय दिल्ली में हैं, जबकि उनकी मां और पूर्व विधायक रेणु जोगी घर पर मौजूद हैं।
पत्नी ने सुनाई उस रात की दर्दनाक कहानी
वहीं, राम अवतार जग्गी की पत्नी गुलशन जग्गी ने 4 जून 2003 की घटना को याद करते हुए अपना दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि उस रात उनके पति घर लौटने वाले थे, लेकिन अचानक खबर मिली कि मोदाहापारा थाना क्षेत्र के पास उनकी हत्या कर दी गई है।
‘चार साल तक नहीं सो पाई’, बोलीं गुलशन जग्गी
गुलशन जग्गी ने बताया कि घटना के बाद कई साल तक वह डर और सदमे में रहीं। उन्हें हर वक्त अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि केस वापस लेने के लिए उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया और परिवार को परेशान किया गया।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला न्याय
गुलशन ने कहा कि यह मामला 23 साल तक चला और आखिरकार न्याय मिला। उन्होंने कहा कि उनके पति का कोई दोष नहीं था, फिर भी उन्हें जान गंवानी पड़ी। इस घटना का दर्द आज भी उनके परिवार के साथ है।
आगे भी जारी रहेगा न्याय का संघर्ष
परिवार का कहना है कि वे अंतिम न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इस फैसले ने जहां एक ओर उन्हें राहत दी है, वहीं दूसरी ओर न्याय को लेकर उनकी उम्मीदें अब भी बाकी हैं।