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Chhattisgarh: New tax regime; Simple system or a challenge for future savings? - CA Suresh Kothari
रायपुर। भारत की आयकर व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों से लगातार बदलाव किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और अधिक से अधिक लोगों को कर दायरे में लाना है 1 अप्रैल 2020 से लागू नई आयकर व्यवस्था 1 अप्रैल 2025 से और भी ज्यादा आकर्षक बनाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पहली नजर में यह व्यवस्था आम करदाता के लिए राहत देने वाली और आसान प्रतीत होती है, लेकिन इसके दूरगामी प्रभाव केवल टैक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आम आदमी की बचत, निवेश और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को भी प्रभावित करने वाले हैं।
नई कर व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें टैक्स की दरें कम और स्लैब अधिक व्यवस्थित हैं। साथ ही, टैक्स गणना की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे करदाता को जटिल गणनाओं और दस्तावेजों की आवश्यकता कम हो गई है।
सरकार ने वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ जारी रखा है और टैक्स रिबेट की सीमा को भी बढ़ाया है, जिससे मध्यम आय वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिल सकता है इसका परिणाम यह होगा कि नौकरीपेशा व्यक्ति और छोटे व्यवसायी के हाथ में पहले की तुलना में अधिक शुद्ध आय बचेगी।
लेकिन इस व्यवस्था का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है नई कर प्रणाली में अधिकांश पारंपरिक छूट और कटौतियों को समाप्त या सीमित कर दिया गया है। पहले लोग जीवन बीमा, भविष्य निधि, होम लोन और अन्य बचत योजनाओं में निवेश करके टैक्स में राहत प्राप्त करते थे इससे न केवल टैक्स बचता था, बल्कि व्यक्ति की दीर्घकालीन आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती थी। अब जब इन छूटों का महत्व कम हो गया है, तो यह संभावना बढ़ गई है कि लोग बचत के बजाय अधिक खर्च को प्राथमिकता देंगे इसका असर भविष्य में उनकी आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।
इस बदलाव का प्रभाव रियल एस्टेट और बीमा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। पहले होम लोन लेने पर मिलने वाली कर छूट लोगों को घर खरीदने के लिए प्रेरित करती थी अब इस प्रोत्साहन के कम होने से कुछ लोग घर खरीदने के बजाय किराए पर रहना अधिक सुविधाजनक समझ सकते हैं इसी प्रकार, जीवन बीमा योजनाएं, जिन्हें पहले टैक्स बचत का एक प्रमुख माध्यम माना जाता था, अब केवल वास्तविक आवश्यकता के आधार पर ही ली जाएंगी।
नई व्यवस्था का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि इससे कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और डिजिटल हो रही है आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो गई है और अधिकांश जानकारी स्वतः उपलब्ध हो जाती है इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि त्रुटियों और अनजाने में होने वाली गलतियों की संभावना भी कम होगी। साथ ही, डिजिटल निगरानी बढ़ने से कर चोरी पर भी नियंत्रण लगेगा।
आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बदलाव देश में उपभोग को बढ़ावा देने वाला हो सकता है कर की दर कम होने से लोगों के पास अधिक खर्च योग्य आय होगी, तो वे अधिक वस्तुएं और सेवाएं खरीदेंगे, जिससे बाजार और उद्योग और व्यापार को गति मिलेगी इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
फिर भी, इस नई व्यवस्था में सबसे बड़ी जिम्मेदारी अब व्यक्ति पर ही आ गई है। पहले कर छूट बचत के लिए एक प्रेरणा का काम करती थी, लेकिन अब बचत करना पूरी तरह व्यक्ति की समझ और अनुशासन पर निर्भर करेगा यदि लोग केवल वर्तमान खर्च पर ध्यान देंगे और भविष्य की योजना नहीं बनाएंगे, तो सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
अंततः, नया आयकर कानून कर प्रणाली को सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह आम करदाता को तत्काल राहत और सुविधा तो देता है, लेकिन इसके साथ ही यह व्यक्ति से अधिक वित्तीय जागरूकता और अनुशासन की अपेक्षा भी करता है इस बदलती व्यवस्था में वही व्यक्ति दीर्घकालीन रूप से लाभ में रहेगा, जो कर बचत से अधिक अपनी आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की योजना को प्राथमिकता देगा।