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Chhattisgarh PDS Scam: Assembly committee holds 208 officials responsible for irregularities worth ₹584 crore.
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सामने आए 584 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच पूरी होने के बाद विधानसभा की विशेष समिति ने अपनी रिपोर्ट में 208 अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, निगरानी तंत्र की कमजोरी और रिकॉर्ड में व्यापक अनियमितताएं सामने आई हैं। इस मामले में विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, घोटाले के लिए तीन तत्कालीन खाद्य सचिव, एक खाद्य संचालक, 23 जिला खाद्य नियंत्रक और 181 खाद्य निरीक्षक जिम्मेदार पाए गए हैं। यह पूरा मामला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान खाद्यान्न वितरण से जुड़ा बताया गया है।
लगभग दो वर्षों तक चली जांच के बाद समिति ने 20 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट विधानसभा को सौंप दी थी। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस रिपोर्ट पर विधानसभा के मानसून सत्र में चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने दावा किया कि समिति की जांच केवल मार्च 2022 से फरवरी 2023 की अवधि तक सीमित रही। उनका कहना है कि यदि कांग्रेस सरकार के पूरे पांच वर्षीय कार्यकाल का ऑडिट कराया जाए तो खाद्यान्न घोटाले का आंकड़ा दो हजार करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है।
सरकार बदलने के बाद 6 फरवरी 2024 को विधानसभा में यह मामला दोबारा उठाया गया। इसके बाद तत्कालीन खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की। पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले की अध्यक्षता वाली इस समिति में विधायक राजेश मूणत, विक्रम उसेंडी, लखेश्वर बघेल और संगीता सिन्हा को सदस्य बनाया गया।
समिति ने फरवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच 15 बैठकें आयोजित कीं और विभाग के तीन अलग-अलग खाद्य सचिवों सहित कई अधिकारियों से पूछताछ की। साथ ही स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच की गई।
रिपोर्ट में समिति ने यह सवाल भी उठाया है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में ई-पॉस मशीनों के माध्यम से राशन वितरण व्यवस्था लागू करने की व्यवस्था किए जाने के बावजूद राज्य में इसे 2022 तक क्यों टाला गया। समिति का मानना है कि इस देरी के कारण बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी नुकसान की आशंका बढ़ी।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों के तहत खाद्यान्न के बदले खाद्यान्न का समायोजन करने का प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में कई स्थानों पर ऐसी विसंगतियां मिलीं। समिति ने स्पष्ट किया कि केवल कारण बताओ नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पूरी कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
धरमलाल कौशिक ने 17 मार्च 2023 को विधानसभा में आरोप लगाया था कि उचित मूल्य दुकानों में चावल, चना, शक्कर और नमक का वितरण रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं हो रहा है। उस समय तत्कालीन खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने सात दिनों में जांच कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई थी।