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Chhattisgarh: Private schools protest for RTE payments, statewide schools shut, increasing pressure on government
रायपुर। छत्तीसगढ़ शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा अब आंदोलन का रूप ले चुका है। RTE के तहत लंबित भुगतान और प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की मांग को लेकर निजी स्कूल संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को विरोध के बाद शनिवार 18 अप्रैल को प्रदेशभर के निजी स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित रही।
काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, अब सीधी टकराव की स्थिति
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेशभर के स्कूल संचालकों और शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं रहा, बल्कि अब यह असहयोग आंदोलन में बदल गया है। स्कूल प्रबंधन का साफ कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाई जा रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
2011 से नहीं बढ़ी प्रतिपूर्ति राशि, बढ़ता जा रहा आर्थिक दबाव
एसोसिएशन के मुताबिक, RTE योजना के तहत वर्ष 2011 में जो प्रतिपूर्ति राशि तय की गई थी, वही आज तक लागू है। उस समय कक्षा 1 से 5 तक के लिए 7000 रुपये प्रति छात्र कक्षा 6 से 8 तक 11400 रुपये प्रति छात्र निर्धारित किए गए थे। इसके बाद 2018 में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को शामिल किया गया, जिनके लिए 15000 रुपये प्रति छात्र तय हुए।
लेकिन बीते वर्षों में महंगाई, स्टाफ वेतन और संचालन लागत में भारी वृद्धि के बावजूद इन दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
लंबित भुगतान ने बढ़ाई परेशानी, संचालन पर संकट
सिर्फ दरों में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि कई स्कूलों को अब तक RTE के तहत मिलने वाली राशि का भुगतान भी नहीं हुआ है। इससे उनकी वित्तीय स्थिति कमजोर होती जा रही है। स्कूल संचालकों का कहना है कि अगर जल्द भुगतान और दरों में संशोधन नहीं किया गया, तो स्कूल चलाना मुश्किल हो जाएगा, जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा।