

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Chhattisgarh: Political battle over UCC intensifies in Chhattisgarh, debate on tribal rights
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति अचानक गरमा गई है। खासकर राज्य की लगभग 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी के अधिकारों और परंपराओं को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
आदिवासी हित बनाम एकरूप कानून, सबसे बड़ा सवाल यही
इस मुद्दे का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि क्या यूसीसी लागू होने के बाद आदिवासी समुदायों की पारंपरिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे। कांग्रेस इसे आदिवासी संस्कृति पर असर डालने वाला कदम बता रही है, जबकि भाजपा इसे सामाजिक समानता की दिशा में जरूरी सुधार मान रही है।
उत्तराखंड मॉडल चर्चा में, क्या छत्तीसगढ़ भी वही रास्ता अपनाएगा
राजनीतिक गलियारों में उत्तराखंड का उदाहरण बार-बार सामने आ रहा है, जहां यूसीसी लागू करते समय आदिवासी समुदायों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। वहां उन्हें विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में अपनी पारंपरिक व्यवस्था बनाए रखने की छूट दी गई है। अब नजर इस बात पर है कि छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी मॉडल को अपनाएगी या कोई अलग रास्ता निकालेगी।
महिला सशक्तिकरण को जोड़कर सरकार दे रही व्यापक संदेश
यूसीसी के साथ ही उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने महिला सशक्तिकरण को भी इस बहस के केंद्र में रखा है। उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और लखपति दीदी जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में महिला आरक्षण से जुड़े विधायी कदम भी इस दिशा को और मजबूती दे सकते हैं।
भाजपा का दावा: समानता और सुरक्षा का संतुलित रास्ता
सत्तापक्ष का कहना है कि यूसीसी का मकसद किसी की संस्कृति को खत्म करना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना है। सरकार का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप समानता लाना जरूरी है और इसमें आदिवासी परंपराओं के संरक्षण का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
कांग्रेस का आरोप: संवैधानिक सुरक्षा कमजोर होने का खतरा
विपक्ष का कहना है कि संविधान की पांचवी अनुसूची और पेसा कानून के तहत आदिवासी समुदायों को जो विशेष अधिकार मिले हैं, यूसीसी लागू होने से वे प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस ने सरकार से साफ जवाब मांगा है कि क्या नए कानून के बाद भी आदिवासियों की स्वायत्तता और पारंपरिक अधिकार पहले जैसे ही सुरक्षित रहेंगे।
सियासी गणित में आदिवासी फैक्टर बेहद अहम
छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। विधानसभा की 90 में से 29 सीटें और लोकसभा की 11 में से 4 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में यूसीसी पर लिया गया कोई भी फैसला सीधे चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
यूसीसी आखिर है क्या, क्यों मची है इतनी बहस
समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जैसे विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के नियम अलग-अलग हैं। यूसीसी लागू होने पर इन सभी कानूनों को एक समान ढांचे में लाने की कोशिश की जाती है।