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Chhattisgarh State Bar Council meeting banned
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों की प्रस्तावित सामान्य सभा की बैठक पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा लगाई गई रोक का मामला अब हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। बीसीआई के इस फैसले को चुनौती देते हुए निर्वाचित सदस्यों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर प्रारंभिक सुनवाई हो चुकी है।
निर्वाचित सदस्यों की ओर से दायर याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव और उनसे जुड़ी प्रक्रियाओं को केवल अफवाहों के आधार पर नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य सभा की बैठक स्थगित करने के पीछे बार काउंसिल ऑफ इंडिया को ठोस और ठहरने योग्य कारण प्रस्तुत करने होंगे।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बीसीआई की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर पिटिशन दायर कर दी गई है। साथ ही बीसीआई की ओर से हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की गई। डिवीजन बेंच ने बीसीआई को दो दिन का समय देते हुए निर्देश दिया कि वह बुधवार 14 जनवरी को अपना जवाब पेश करे।
इधर, हाईकोर्ट की नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है और इस मामले में अगली सुनवाई 18 जनवरी को तय की गई है। ऐसे में अब यह मामला दो न्यायिक स्तरों पर विचाराधीन है।
गौरतलब है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में कथित धांधली की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। बीसीआई ने आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान लग्जरी कारें और पैसे बांटे जाने की शिकायतें सामने आई हैं तथा हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका भी जताई गई है। इन्हीं आरोपों के आधार पर सामान्य सभा की बैठक को स्थगित किया गया है।
बीसीआई के आदेश के अनुसार गठित तीन सदस्यीय जांच समिति को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। वहीं बीसीआई के इस निर्णय को चुनौती देने वाले निर्वाचित सदस्यों में बीपी सिंह, जेके त्रिपाठी, अशोक तिवारी, फैजल रिजवी, संतोष वर्मा, चंद्र प्रकाश जांगड़े सहित कुल 19 सदस्य शामिल हैं।
मामले की अगली सुनवाई और बीसीआई के जवाब के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि सामान्य सभा की बैठक पर लगी रोक आगे जारी रहेगी या निर्वाचित सदस्यों को राहत मिलेगी। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश के अधिवक्ता जगत की नजरें टिकी हुई हैं।