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Chhattisgarh to formulate AI policy; data security and citizens' privacy to be given top priority.
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार उपयोग के लिए जल्द ही राज्य की एआई नीति तैयार करेगी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता की रक्षा, नियमित तकनीकी ऑडिट और केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप मजबूत व्यवस्था विकसित करना होगा।इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार, भारतनेट फेज-3, सेवा सेतु और अन्य डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि शासन के विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक विभाग अपना अलग रोडमैप तैयार करेगा और एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों में एआई आधारित पायलट परियोजनाएं भी शुरू की जाएंगी।
सरकार नागरिकों को उनकी मातृभाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 'भाषिणी' प्लेटफार्म का उपयोग करेगी। इससे सरकारी सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सरल, सुलभ और सभी वर्गों के लिए उपयोगी बन सकेंगी।
राज्य सरकार ने एआई को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने का फैसला किया है। इसके तहत विद्यार्थियों और सरकारी कर्मचारियों को एआई की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।स्कूलों में एआई जागरूकता अभियान, एआई और रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। वहीं महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम शुरू होंगे। आईटीआई में एआई लैब स्थापित की जाएंगी और विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे।इसके अलावा छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, एआई डेटा लैब, स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और सीड फंडिंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि राज्य में मजबूत एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार हो सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस दिशा में देश के अग्रणी प्रदेशों में शामिल होने की क्षमता रखता है।उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, प्रशासनिक दक्षता और बेहतर जनसेवा का प्रभावी माध्यम है। सरकार का उद्देश्य सिर्फ नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के अनुरूप तैयार करना, उद्योगों और व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।मुख्यमंत्री ने सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में लगभग एक हजार नए मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति मिल चुकी है।इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो गई है, जबकि शेष 171 मामलों का निराकरण अगले एक महीने के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारतनेट फेज-3 परियोजना के तहत राज्य की 4114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा और गांवों तक एफटीटीएच इंटरनेट सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को भी तेज और गुणवत्तापूर्ण इंटरनेट सुविधा मिल सके।बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।