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Chhattisgarh's Kosa gains global recognition with Koshal Fab.
रायपुर, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब' का शुभारंभ किया। इस दौरान ब्रांड के लोगो और कैटलॉग का विमोचन किया गया तथा हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया गया। कार्यक्रम में रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के हितग्राहियों और मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की गई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और पारंपरिक हथकरघा उत्पाद अब देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य इन उत्पादों को 'लोकल टू ग्लोबल' पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिजाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और नए बाजार उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसी अवधि में आयोजित 47 प्रदर्शनियों के जरिए लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई। वहीं 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने विभिन्न शासकीय विभागों को 93 करोड़ रुपये के वस्त्र उपलब्ध कराए हैं, जबकि बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की सरकारी खरीदी की गई है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के हैंडलूम और हस्तशिल्प उत्पादों के शोरूम देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल और नवा रायपुर में बनने वाली पहली गारमेंट इकाई इस क्षेत्र को नई दिशा देंगे।

आत्मसमर्पित महिलाओं का रैंप वॉक बना आकर्षण
कार्यक्रम का सबसे प्रेरक क्षण तब रहा जब बस्तर की आत्मसमर्पित महिलाओं ने स्वदेशी फैशन शो में कोसा सिल्क और पारंपरिक हैंडलूम परिधानों में रैंप वॉक किया। इस प्रस्तुति ने मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की उनकी यात्रा को दर्शाया। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।
'कोशल फैब' देगा वैश्विक पहचान
'लूम टू लग्जरी' की अवधारणा पर आधारित कोशल फैब ब्रांड छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा। इसके साथ ही एनआईटी के सहयोग से विकसित इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया गया, जिससे उत्पादों के भंडारण, विपणन और वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

बुनकरों और शिल्पकारों को मिली बड़ी सौगात
कार्यक्रम में 935 मेधावी छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि, 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि, 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति, पांच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये, 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं उपकरण, 21 रेशम कृषकों को सहायता राशि, 30 शिल्पकारों को आधुनिक टूल किट तथा 70 माटी शिल्पियों को विद्युत चाक वितरित किए गए।

'सेल्फी विद स्वदेशी' अभियान की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पाद खरीदकर उनके साथ 'सेल्फी विद स्वदेशी' अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद बुनकरों और शिल्पकारों की आजीविका को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी सशक्त बनाएगी। अभियान के तहत प्रत्येक जिले से चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
