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Citing the Dawood case, Suryakant Tiwari's diary, and 24 notices... this is how Ramgopal found himself cornered.
रायपुर। कथित कोल लेवी घोटाले में आरोपित छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से बुधवार देर रात तक आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने लंबी पूछताछ की। एजेंसी उन्हें गुरुवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, EOW पूछताछ को आगे बढ़ाने के लिए अदालत से सात दिनों की रिमांड की मांग करने की तैयारी में है।
जांच एजेंसी के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से पूछताछ से बच रहे थे। उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए 24 से अधिक नोटिस जारी किए गए, लेकिन वे एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद विशेष अदालत से स्थायी गैरजमानती वारंट जारी होने पर EOW ने उन्हें गिरफ्तार करने की रणनीति बनाई।
सूत्रों के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल अपने राइस मिल संचालक बेटे वैभव अग्रवाल और अन्य परिजनों के संपर्क में थे। एजेंसी ने वैभव अग्रवाल को मंगलवार और बुधवार को तलब कर कई घंटे पूछताछ की। इसके बाद बुधवार को रामगोपाल अग्रवाल अपने बेटे के साथ EOW कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने आत्मसमर्पण किया। देर शाम वैभव को छोड़ दिया गया, जबकि रामगोपाल अग्रवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी रही।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल पिछले कुछ समय से नेपाल में रह रहे थे। हालांकि, इस संबंध में एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि वे बुधवार सुबह रायपुर पहुंचे और सीधे EOW कार्यालय पहुंचे।
EOW अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ केवल कथित 500 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले तक सीमित नहीं है। एजेंसी 3,200 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले और 127 करोड़ रुपये के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले में भी उनकी संभावित भूमिका की जांच कर रही है। दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
गैरजमानती वारंट जारी कराने के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत में दलील दी कि रामगोपाल अग्रवाल सहित अन्य आरोपित लगातार जांच से बच रहे हैं। एजेंसी ने अपने पक्ष में भगोड़े अपराधी दाऊद इब्राहिम से जुड़े एक पुराने मामले का हवाला दिया, जिसमें विवेचना के दौरान गैरजमानती वारंट जारी करने के प्रावधान को स्वीकार किया गया था। अदालत की सहमति के बाद रामगोपाल अग्रवाल समेत चार आरोपितों के खिलाफ वारंट जारी किया गया।
रामगोपाल अग्रवाल करीब चार दशक से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2013 में उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन पार्टी के वित्तीय प्रबंधन और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी भी माना जाता है। कांग्रेस सरकार के दौरान वे नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष भी रहे।