

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Crackdown on analogue paneer; rapid-fire inspections of factories in Raipur; butter and curd now also under scrutiny.
रायपुर। एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लागू होने के बाद रायपुर जिले में खाद्य एवं औषधि विभाग ने निगरानी अभियान तेज कर दिया है। विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ निरीक्षण कर यह जांच की कि कहीं प्रतिबंधित उत्पाद का निर्माण तो नहीं हो रहा। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जिले में एनालॉग पनीर का उत्पादन पूरी तरह बंद पाया गया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल एनालॉग पनीर ही नहीं, बल्कि इसी तकनीक से तैयार किए जाने वाले मक्खन और दही के उत्पादन एवं बिक्री पर भी प्रतिबंध लागू है। इसी कारण अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए इन उत्पादों की भी निगरानी की जा रही है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने भाठागांव स्थित मेसर्स केएलपी, निमोरा की एसजे डेयरी प्रोडक्ट्स, बीरगांव स्थित मेसर्स कांशी एको और श्री सावरिया सेठ मिल्क प्रोडक्ट्स सहित कई इकाइयों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कहीं भी प्रतिबंधित उत्पाद के निर्माण या अन्य अनियमितता के प्रमाण नहीं मिले।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सभी डेयरी संचालकों को खाद्य सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए। विभाग ने साफ किया कि यदि भविष्य में किसी भी इकाई में प्रतिबंधित उत्पाद का निर्माण या बिक्री पाई गई तो संबंधित संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य एवं औषधि विभाग ने बताया कि प्रतिबंध लागू होने के बाद बाजार में उपलब्ध पनीर के स्टॉक और उसकी बिक्री पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग का उद्देश्य किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अवैध भंडारण को रोकना है। व्यापारियों को भी चेतावनी दी गई है कि वे प्रतिबंधित उत्पाद का अवैध स्टॉक न रखें, अन्यथा सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।