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Cultivation of banned cannabis uncovered.
भानुप्रतापपुर जिले में गांजा तस्करी के साथ-साथ अब इसकी खेती भी की जाने लगी है। जिले के ग्राम भुरसातरहूल में पुलिस ने दबिश देकर एक एकड़ खेत में अरहर और चेंच भाजी की आड़ में उगाए जा रहे गांजे के 844 पौधे जब्त किए। जब्त पौधों का वजन 8.50 किलोग्राम है। इसका बाजार मूल्य करीब 4 लाख 25 हजार रुपए आंका गया है। पुलिस ने मौके पर ही मोबाइल फोरेंसिक टीम से जांच कराई, जिसमें गांजे की पुष्टि हुई। 42 वर्षीय आरोपी किसान सुभाष कोरेटी को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है, कि आरोपी ने चार महीने पहले बीजों से नर्सरी तैयार कर गांजे के पौधों को लगाया था।
पुलिस ने जब आरोपी से पूछताछ की तो उसने बताया, कि यह गांजा उसने अपने उपयोग के लिए लगाया था। गांव के सरपंच फुलमत पिस्दा ने कहा, की गांव में गांजे की खेती करना गलत है। पुलिस को इसपर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
आपको बता दें, कि पहले देश में कई जगहों पर गांजा की खेती कर पारंपरिक दवा और धार्मिक कार्यों में उपयोग के लिए की जाती थी, लेकिन नशे के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए सरकार ने इसपर रोक लगा दी। 1985 में केन्द्र में राजीव गांधी की सरकार ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट लागू कर गांजे की खेती को प्रतिबंधित कर दिया था। आज के समय में ओडिसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ दुर्गम और अंदरूनी इलाकों में गांजे की अवैध खेती होती है और इन इलाकों से लाकर तस्कर इसे अन्य जगहों पर उंचे दामों पर बेचते हैं।
गांजे की खेती की अगर बात करें तो कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीरबल साहू ने बताया, कि कुछ लोग पुलिस की नजर से बचाने के लिए अरहर की खेती के बीच-बीच में गांजा के पौधे लगाते हैं, क्योंकि गांजा और अरहर के पौधों में काफी समानता होती है, जिससे दूर से देखने पर दोनों की पहचान करना मुश्किल होता है इसके अलावे अगर गांजे के पौधे से आने वाली विशिष्ट गंध की बात करें तो अरहर की घनी फसल और उसके फूलों की महक के बीच इसकी महक काफी हद तक दब जाती है, इसलिए कुछ लोग गांजे का पौधा अरहर के खेतों के बीच चोरी छिपे लगाते हैं।