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chhattisgarh government gives minister status to 18 leaders cabinet minister status 3 chairs
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक और राजनीतिक नियुक्तियों के क्रम में एक बड़ा फैसला लेते हुए विभिन्न मंडलों, बोर्डों, आयोगों और विकास संस्थाओं के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों को मंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत की ओर से गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया। आदेश के तहत कुल 18 पदाधिकारियों को मंत्री स्तर का दर्जा दिया गया है।
सरकार के इस फैसले को विभिन्न आयोगों, निगमों, बोर्डों और अकादमियों में जिम्मेदारी संभाल रहे नेताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्री स्तर का दर्जा मिलने के बाद इन पदाधिकारियों को सरकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक गतिविधियों में प्रोटोकॉल के लिहाज से विशेष सुविधाएं प्राप्त होंगी।
तीन प्रमुख चेहरों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा
आदेश के अनुसार राज्य स्तर के तीन महत्वपूर्ण आयोगों के अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। इनमें राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल चौहान, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू शामिल हैं।
खास बात यह है कि रूप सिंह मंडावी को पहले राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था, जिसे अब संशोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री के दर्जे में तब्दील कर दिया गया है। वहीं अनुसूचित जाति और महिला आयोग के अध्यक्षों को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने से इन संवैधानिक-सामाजिक महत्व वाले आयोगों की प्रमुखता को रेखांकित किया गया है।
15 पदाधिकारियों को राज्य मंत्री का दर्जा
सरकार ने विभिन्न विकास निगमों, कल्याण बोर्डों, अकादमियों और आयोगों के अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया है।
इस सूची में प्रमुख रूप से राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष आनंद निषाद, संस्कृत विद्या मंडल के अध्यक्ष राजेश कुमार राजपूत, शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष राजेंद्र नायक और राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष एजाज मिर्जा बेग, राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन, राज्य राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, राज्य सिंधी अकादमी की अध्यक्ष सुषमा जेठानी और राज्य सहकारी विपणन संघ के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी को भी राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है।
इन उपाध्यक्षों को भी मिला राज्य मंत्री का दर्जा
सरकार के आदेश में कुछ महत्वपूर्ण संस्थाओं के उपाध्यक्षों को भी राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। इनमें रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. जेपी शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष किशोर महानंद, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष आनंद कुमार तिवारी (राजीव लोचन दास महाराज), राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष वेदराम मनहरे और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष मंगल दास ठाकुर शामिल हैं।
प्रोटोकॉल और प्रशासनिक कामकाज के लिए महत्वपूर्ण फैसला
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पदाधिकारियों को दिया गया यह दर्जा किसी प्रकार की वरिष्ठता या आधिकारिक प्रोटोकॉल की स्थिति को प्रदर्शित नहीं करता। इसका उद्देश्य संबंधित संस्थाओं के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों के प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाने से जुड़ा है।
सरकार के इस निर्णय से एक ओर जहां विभिन्न आयोगों और बोर्डों के प्रमुखों को प्रशासनिक स्तर पर अधिक औपचारिक दर्जा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर इसे राज्य में चल रही राजनीतिक एवं प्रशासनिक नियुक्तियों के बीच एक अहम कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, 18 पदाधिकारियों को मंत्री स्तर का दर्जा दिए जाने के इस फैसले में तीन नेताओं को कैबिनेट मंत्री और अन्य 15 पदाधिकारियों को राज्य मंत्री का दर्जा मिला है। आदेश के लागू होने के साथ ही संबंधित संस्थाओं के प्रमुखों को सरकारी कार्यक्रमों एवं प्रशासनिक गतिविधियों में निर्धारित मंत्री स्तर के अनुरूप सुविधाएं और प्रोटोकॉल उपलब्ध होंगे।