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DNA test of children not necessary to prove wife's affair: High Court
विजयनगरम। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि पत्नी के कथित अवैध संबंध को साबित करने के लिए पति अपने बच्चों का बच्चों का DNA टेस्ट कराने की मांग नहीं कर सकता। कोर्ट ने इस मामले में 59 वर्षीय व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें तलाक केस के दौरान बच्चों की DNA फिंगरप्रिंटिंग की अनुमति देने से इनकार किया गया था।
पत्नी के कथित संबंध के आधार पर नहीं होगी जांच
विजयनगरम से जुड़े इस मामले में अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पत्नी का किसी दूसरे पुरुष के साथ अवैध संबंध होने का आरोप है, बच्चों को इस विवाद में नहीं घसीटा जा सकता। जस्टिस तरलाडा राजशेखर राव ने स्पष्ट किया कि भले ही यह मान लिया जाए कि पत्नी का किसी अन्य पुरुष से संबंध है, तब भी पति बच्चों का DNA टेस्ट कराने की मांग नहीं कर सकता।
बच्चों को विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब बच्चे न तो पिता से गुजारा भत्ता मांग रहे हैं और न ही उस कथित दूसरे पुरुष से, तब उन्हें वैवाहिक विवाद के केंद्र में लाना उचित नहीं है। अदालत ने माना कि बच्चों को ऐसे निजी और संवेदनशील विवाद में शामिल करना उनके हित में नहीं होगा।
फैसले से बच्चों की निजता पर जोर
यह फैसला बताता है कि अदालतें पारिवारिक मामलों में बच्चों के अधिकार, गरिमा और निजता को गंभीरता से देखती हैं। बच्चों का DNA टेस्ट केवल आरोपों के आधार पर नहीं कराया जा सकता। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी साफ संदेश देती है कि वैवाहिक विवाद में बच्चों को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना कानूनन और नैतिक रूप से उचित नहीं माना जाएगा।