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Dareli moves from terror to development: Administration arrives after 40 years, census opens the way for schemes
बीजापुर। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड का दारेली गांव अब विकास, विश्वास और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। कभी माओवादी दहशत, बंदूक और सन्नाटे के लिए पहचाने जाने वाला यह गांव अब प्रशासनिक पहुंच और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने लगा है। तेलंगाना सीमा से लगे इस गांव में करीब चार दशकों बाद पहली बार जिला प्रशासन की टीम पहुंची, जिसने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगा दी।
पहली बार हुई जनगणना, योजनाओं का मिलेगा लाभ
वर्ष 2026 की जनगणना के तहत प्रशासनिक टीम ने दारेली गांव में जनगणना कार्य संपन्न कराया। प्रशासन का कहना है कि वर्ष 2011 की राष्ट्रीय जनगणना से वंचित रह चुके ग्रामीणों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। जनगणना के माध्यम से गांव के लोगों की आधिकारिक पहचान और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है।
ग्रामीणों ने किया अधिकारियों का आत्मीय स्वागत
जब कलेक्टर विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे, जनगणना प्रभारी मुकेश देवांगन और उसूर एसडीएम भूपेंद्र गावरे सहित अन्य अधिकारी गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ है कि सरकार सच में उनके द्वार तक पहुंची है।
चौपाल लगाकर सुनी समस्याएं
कलेक्टर विश्वदीप ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान जमीन के पट्टे, पहचान पत्र, बैंक खाते और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेजों की समीक्षा की गई। कई ग्रामीणों के दस्तावेज अधूरे पाए गए, जिस पर कलेक्टर ने अधिकारियों को विशेष शिविर आयोजित कर शत-प्रतिशत दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
किसान की समस्या का मौके पर समाधान
भ्रमण के दौरान एक किसान ने बताया कि पिता के निधन के बाद भी उसकी जमीन का नामांतरण नहीं हो पाया है। कलेक्टर ने तुरंत राजस्व अधिकारियों को प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। मौके पर समस्या का समाधान होने से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ।
आवास और छात्रवृत्ति योजनाओं पर विशेष जोर
कलेक्टर ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी दी और पंचायत के सभी स्कूली बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने की घोषणा की। प्रशासन का उद्देश्य अब गांव को मुख्यधारा से जोड़कर विकास की नई दिशा देना है।
बदलते दारेली की नई तस्वीर
जो दारेली गांव कभी भय और अलगाव का प्रतीक माना जाता था, वही अब विकास और भरोसे की नई मिसाल बनता दिखाई दे रहा है। प्रशासनिक पहुंच, योजनाओं की जानकारी और समस्याओं के त्वरित समाधान से ग्रामीणों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।