

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Daughter-in-law who received a compassionate appointment must give 25% of her salary to her mother-in-law: High Court.
पति की मौत के बाद उसके स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति में सरकारी नौकरी हासिल करने वाली बहू को अपने वेतन का 25 प्रतिशत हिस्सा अब अपनी सास को देना होगा। उसे प्रति माह सास के बैंक खाते में राशि जमा करवानी होगी।
राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश आनंद शर्मा ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड यानी एवीवीएनएल को निर्देश दिया, कि बहू के मासिक वेतन से 25 प्रतिशत की कटौती कर उस रकम को सास के खाते में जमा करवाया जाना चाहिए।
आपको बता दें, कि इस मामले में सास और ससुर ने वर्ष 2018 में हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था, कि उनका पुत्र एवीवीएनएल में तकनीकी सहायक के पद पर कार्यरत था, जिसकी वर्ष 2017 में मौत हो गयी थी। बेटे की मौत के बाद उन्होंने बहू को अनुकंपा नियुक्ति दिलवाने को लेकर प्रयास किए। यह नियुक्ति मिल भी गई, लेकिन नौकरी मिलने के बाद बहू ने ससुराल छोड़ दिया।
हाई कोर्ट ने इस मामले में फैसला देते हुए कहा, कि अनुकंपा नियुक्ति कोई व्यक्तिगत अथवा विशेषाधिकार नहीं, बल्कि कल्याणकारी उपाय है। परिवार का भरण-पोषण करने का शपथ पत्र ही इस नियुक्ति का मुख्य आधार था। अब दायित्व से पीछे हटना अनुकंपा नियुक्ति की योजना की मूलभावना का उल्लंघन है। सास के वकील रमिक पारीक ने बाताया, कि बहू की और से दलील दी गई कि उन्हें जो वेतन मिल रहा है, वह पति की सेवा के बदले मिली अनुकंपा नियुक्ति से प्राप्त रोजगार का परिणाम है। इसे व्यक्तिगत रूप से देखा जाना चाहिए। बहू ने कहा, कि ससुराल में होने वाले दुर्व्यवहार के कारण वह अलग रहने लगी है।