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Death penalty sought for Tahir Hussain in Ankit Sharma murder case; court to pronounce sentence on July 31.
नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों की सजा पर सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में बहस पूरी हो गई। अभियोजन पक्ष ने इस मामले को बेहद गंभीर और दुर्लभतम अपराध बताते हुए ताहिर हुसैन के लिए फांसी की सजा की मांग की है।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 31 जुलाई को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत सजा का ऐलान करेगी।
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत में दलील दी कि अंकित शर्मा की हत्या जिस तरीके से की गई, वह समाज को झकझोर देने वाली घटना है। उन्होंने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर श्रेणी का अपराध बताते हुए अधिकतम सजा की मांग की।अभियोजन के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान मिले थे, जिनमें से 18 घाव धारदार हथियार से किए गए थे। अभियोजन ने कहा कि हत्या के बाद शव को चांद बाग नाले में फेंक दिया गया था और शरीर पर कपड़े भी नहीं थे।सरकारी वकील ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं था, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ किया गया गंभीर अपराध था। इसलिए दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।
इस मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन, अनस, कासिम, जावेद और नाजिम को हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया है।सुनवाई के दौरान सभी दोषी अदालत में मौजूद रहे। अभियोजन पक्ष ने कहा कि दोषियों ने घटना को बेहद बेरहमी से अंजाम दिया और पीड़ित के प्रति किसी तरह की संवेदना नहीं दिखाई।
ताहिर हुसैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव मोहन ने मृत्युदंड की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला उन मामलों की श्रेणी में नहीं आता, जिनमें फांसी की सजा दी जाती है।बचाव पक्ष ने दलील दी कि अदालत ने ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश की धारा 120-बी से बरी किया है। इसका मतलब है कि हत्या की पहले से बनाई गई योजना साबित नहीं हुई।उन्होंने कहा कि ताहिर हुसैन को हिंसक भीड़ का हिस्सा मानते हुए दोषी ठहराया गया है, इसलिए इसे दुर्लभतम अपराध नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष ने उम्र, स्वास्थ्य और सुधार की संभावना का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की मांग की।
गौरतलब है कि 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उनका शव नाले से बरामद हुआ था।दिल्ली दंगों में कुल 53 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। अंकित शर्मा हत्याकांड में अब अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।