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Delhi High Court's big decision, spouse's income will no longer be made public through RTI, strict stance on personal information
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति सूचना के अधिकार कानून के तहत अपने जीवनसाथी की आय का विवरण प्राप्त नहीं कर सकता। यह फैसला निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है।हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 28 अप्रैल को दिए अपने निर्णय में कहा कि किसी भी व्यक्ति की आयकर से जुड़ी जानकारी ‘निजी सूचना’ की श्रेणी में आती है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
धारा 8(1)(जे) के तहत मिली सुरक्षा, जनहित न हो तो नहीं मिलेगी जानकारी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत ऐसी निजी जानकारी को उजागर करने से छूट प्राप्त है, जब तक कि इसमें कोई बड़ा जनहित जुड़ा हुआ न हो।इस फैसले के साथ अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि हर निजी जानकारी को आरटीआई के दायरे में लाना संभव नहीं है।
गुजारा भत्ता विवाद में मांगी गई थी पति की आय की जानकारी
यह मामला एक महिला से जुड़ा था, जिसने अपने पति के खिलाफ गुजारा भत्ता का केस दायर किया था। इसी दौरान उसने आरटीआई के जरिए पति की 2007-08 से अब तक की आयकर योग्य आमदनी की जानकारी मांगी थी।महिला का तर्क था कि यह जानकारी उसके कानूनी मामले में जरूरी है, लेकिन अदालत ने इसे निजी डेटा मानते हुए सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।
केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को हाई कोर्ट ने किया रद्द
इससे पहले केंद्रीय सूचना आयोग ने वर्ष 2021 में यह जानकारी देने का निर्देश दिया था। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि आयकर से जुड़ा विवरण व्यक्तिगत गोपनीयता का हिस्सा है।
कोर्ट का अहम संदेश, पारिवारिक मामलों में अलग व्यवस्था मौजूद
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि गुजारा भत्ता जैसे मामलों में दोनों पक्षों को अदालत के सामने अपनी आय, संपत्ति और देनदारियों की जानकारी देनी होती है।इसलिए ऐसे मामलों में आरटीआई के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत जानकारी का खुलासा पहले से ही निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होता है।
निजता बनाम सूचना अधिकार पर फिर छिड़ी बहस
यह फैसला एक बार फिर निजता के अधिकार और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस को सामने लाता है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी को बिना ठोस जनहित के सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।