

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

The High Court issued a strong statement on the 90-year defamation case, setting a date of 2046, but then abruptly reversed its decision.
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट में एक मानहानि मामले ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे न्यायिक सिस्टम को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। 90 वर्षीय महिला वादी द्वारा मुकदमे को जारी रखने की जिद के चलते अदालत ने इसे लंबी खींची जा रही अहंकार की लड़ाई करार देते हुए पहले सुनवाई 2046 तक स्थगित कर दी थी। हालांकि, अगले ही दिन इस आदेश में संशोधन कर नई तारीख जुलाई 2026 तय कर दी गई।
अदालत की तीखी टिप्पणी अहंकार की लड़ाई बन गया मामला, जरूरी केस हो रहे प्रभावित
जस्टिस जितेंद्र जैन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें दोनों पक्ष जीवन के अंतिम चरण में भी कानूनी लड़ाई छोड़ने को तैयार नहीं हैं।अदालत ने कहा कि इस तरह के मुकदमे न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालते हैं और इससे जरूरी मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है।
20 करोड़ रुपये का मानहानि मामला समझौते की कोशिश भी हुई नाकाम
यह मामला 20 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें समझौते के प्रयास भी किए गए थे। अदालत ने प्रतिवादियों को बिना शर्त माफी का विकल्प भी दिया था, लेकिन वादी ने मुकदमा आगे बढ़ाने पर जोर दिया।इसी जिद के चलते अदालत ने कड़े शब्दों में टिप्पणी की और सुनवाई को लंबी अवधि के लिए स्थगित करने की बात कही थी।
2046 की तारीख से मचा हड़कंप फिर हुआ संशोधन और मिली नई तारीख
मंगलवार को अदालत ने प्रतीकात्मक रूप से मामले को 2046 तक टालने की बात कही थी, जिसे कानूनी दुनिया में एक सख्त संदेश माना गया।लेकिन बुधवार को याचिकाकर्ता के अनुरोध के बाद आदेश में संशोधन किया गया और अब इस मामले की सुनवाई जुलाई 2026 में तय की गई है।
न्याय व्यवस्था पर दबाव और प्राथमिकता का सवाल
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामले न्याय प्रणाली को अवरुद्ध करते हैं और इससे उन मामलों की सुनवाई में देरी होती है जिन्हें तत्काल प्राथमिकता की जरूरत होती है।