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Delhi High Court issues major order in excise case, directs removal of comments on CBI
नई दिल्ली। दिल्ली एक्साइज केस में सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम आदेश जारी किया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले से CBI और जांच अधिकारी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दिया, जिसमें सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया था। यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें कई राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों पर आरोप लगाए गए थे। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद जांच एजेंसियों ने हाई कोर्ट का रुख किया था।
CBI की अपील पर हाई कोर्ट का निर्देश
जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने CBI की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। CBI ने अपने तर्क में कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश ऐसा प्रतीत होता है जैसे बिना ट्रायल के ही आरोपियों को बरी कर दिया गया हो।
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती हैं, जबकि मामले की पूरी सुनवाई अभी हुई ही नहीं थी।
ED ने भी जताई आपत्ति
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी हाई कोर्ट में अपील दायर की है। ED का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी एजेंसी के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां कीं, जबकि न तो एजेंसी के सबूतों की जांच की गई और न ही उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया।
ED ने 27 फरवरी के आदेश को ‘न्यायिक अतिक्रमण’ करार देते हुए इन टिप्पणियों को हटाने की मांग की है।
मामले में आगे की सुनवाई
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अन्य पक्षों को भी नोटिस जारी किया है। दिलचस्प बात यह रही कि सुनवाई के समय आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं समेत 23 प्रतिवादियों में से कोई भी अदालत में मौजूद नहीं था।