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Delhi High Court orders removal of defamatory material related to Himyani Puri within 24 hours
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी से जुड़ी कथित हिमायनी पुरी मानहानिकारक सामग्री को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य मध्यस्थों को निर्देश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर इस तरह की प्रसारित सामग्री को हटा दें। मामला हिमायनी पुरी का नाम अमेरिकी बाल यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जोड़ने से संबंधित पोस्ट और सामग्री पर आधारित है, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया।
भारत में ही लागू होगा अदालत का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश केवल भारत में प्रभावी होगा। अदालत ने कहा कि अगर संबंधित उपयोगकर्ता पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मध्यस्थ स्वयं ऐसी सामग्री को हटाएंगे या उसकी पहुंच को ब्लॉक करेंगे। हालांकि, वैश्विक स्तर पर ब्लॉकिंग लागू नहीं की जाएगी। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 अगस्त की तारीख तय की है। इस तरह हिमायनी पुरी मानहानिकारक सामग्री के मामले में फिलहाल भारत के भीतर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है।
अदालत ने माना प्रथम दृष्टया मामला बनता है
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि हिमायनी पुरी के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है। कोर्ट का मानना है कि अगर उन्हें अंतरिम राहत नहीं दी गई, तो उनकी प्रतिष्ठा को होने वाले नुकसान की भरपाई करना संभव नहीं होगा। हिमायनी पुरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि उनकी मुवक्किल एक वित्तीय पेशेवर हैं और उनकी वैश्विक साख की रक्षा जरूरी है। उन्होंने अदालत से मानहानिकारक सामग्री को वैश्विक स्तर पर ब्लॉक करने की भी मांग की, लेकिन अदालत ने फिलहाल आदेश को भारत तक सीमित रखा।
10 करोड़ रुपये हर्जाने की भी मांग
इस मामले में हिमायनी पुरी ने अदालत से 10 करोड़ रुपये हर्जाने की भी मांग की है। साथ ही, उन्होंने कई संस्थाओं और प्लेटफॉर्म्स को ऐसी हिमायनी पुरी मानहानिकारक सामग्री के प्रसार से रोकने के आदेश की मांग की है। सुनवाई के दौरान एक प्रतिवादी की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि उनका वीडियो पत्रकारिता की स्वतंत्रता के तहत था। फिलहाल अदालत ने मुकदमे से जुड़े आठ उपयोगकर्ताओं और इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स को समन जारी कर जवाब मांगा है।