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Demand for relief package following devastation caused by floods in Bastar; emphasis on alerts issued 24–48 hours in advance and a new flood management plan.
रायपुर। बस्तर में आई बाढ़ से हुए बड़े नुकसान के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने केंद्र और राज्य सरकार से विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र भेजकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया है।देव ने मांग की है कि प्रभावित किसानों को खरीफ फसलों के नुकसान के आधार पर प्रति एकड़ विशेष राहत दी जाए। बाढ़ में क्षतिग्रस्त मकानों के लिए आर्थिक सहायता के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा बह गए या क्षतिग्रस्त पशुधन, छोटे कारोबार और दुकानों के नुकसान का सर्वे कर सीधे खाते में मुआवजा देने की व्यवस्था की जाए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसका असर जगदलपुर सहित आसपास के कई ग्रामीण इलाकों में दिखाई दिया। बाढ़ के कारण बड़े क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुईं, मकानों को नुकसान पहुंचा और सामान्य जनजीवन बाधित हुआ।उन्होंने भविष्य में ऐसी स्थिति से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए केवल राहत तक सीमित रहने के बजाय स्थायी बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई है।
किरण सिंह देव ने जोरा नाले की मौजूदा व्यवस्था का नए सिरे से अध्ययन कर आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराने और नई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की मांग की है। उनका कहना है कि जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए गेटेड रेगुलेटर स्ट्रक्चर जैसी व्यवस्था पर भी काम किया जाना चाहिए।इसके साथ ही संवेदनशील नदी तटों पर तटबंध बनाने और जगदलपुर में एकीकृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
बाढ़ से निपटने के लिए पत्र में रियल टाइम सूचना तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़ने के समय और मात्रा की जानकारी टेलीमेट्री सिस्टम के जरिए छत्तीसगढ़ के साथ साझा करने की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।इंद्रावती बेसिन में सेंसर आधारित चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका उद्देश्य निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पानी छोड़े जाने से 24 से 48 घंटे पहले सूचना देना और जरूरत पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।
देव ने इंद्रावती और उसकी सहायक नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधरोपण, मृदा संरक्षण और कंटूर ट्रेंचिंग जैसे कार्य कराने की जरूरत बताई है। नदियों में जमा गाद हटाने के लिए ड्रेजिंग प्रोजेक्ट शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है।उन्होंने बाढ़ से हुए नुकसान के वास्तविक आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयीन केंद्रीय टीम को बस्तर भेजने की मांग की है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों का भौतिक सत्यापन कर नुकसान के आधार पर राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।