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Deva Snan Purnima: Grand ceremonial bath of Lord Jagannath with 108 pitchers of water.
भिलाई/दुर्ग। जगन्नाथपुरी की परंपरा के अनुरूप सोमवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ सहित देशभर के जगन्नाथ मंदिरों में देव स्नान पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। भिलाई के सेक्टर-6 स्थित उत्कल सांस्कृतिक परिषद् के श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के सुगंधित एवं औषधीय जल से महास्नान कराया गया। इसके बाद महाप्रभु को आकर्षक गजवेश (गणेश वेश) में सजाया गया, जिसके दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देव स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ का विशेष अभिषेक किया जाता है। अत्यधिक स्नान के कारण भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और इसके बाद 15 दिनों तक अनासर (एकांतवास) में रहते हैं। इस अवधि में मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं तथा भगवान का उपचार जड़ी-बूटियों और विशेष काढ़े के भोग से किया जाता है। अनासर अवधि समाप्त होने के बाद भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके पश्चात 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथयात्रा पर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।

108 कलशों से हुआ महास्नान
मंदिर में सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान को पहांडी विजय के माध्यम से स्नान मंडप तक लाया गया। षोडशोपचार पूजन के बाद 108 अभिमंत्रित कलशों के सुगंधित और औषधीय जल से भगवान का महास्नान कराया गया। इसके उपरांत महाप्रभु को गजवेश धारण कराया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

भक्तों ने मांगा प्रदेश की खुशहाली का आशीर्वाद
देव स्नान महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, किसानों की खुशहाली और सभी के मंगल की कामना की। श्रद्धालु प्रीतपाल बेलचंदन ने कहा कि यह उनके जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण है। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं भगवान ने उन्हें अपने दर्शन के लिए बुलाया हो। उन्होंने भगवान के चरणों में प्रदेशवासियों की खुशहाली और किसानों के कल्याण की प्रार्थना की।
15 दिनों तक रहेंगे अनासर में
श्री जगन्नाथ मंदिर, सेक्टर-6 भिलाई के मुख्य पुजारी तुषार कांत महापात्र ने बताया कि स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विधि-विधान से महास्नान कराया गया। स्नान के बाद भगवान गजानन (गजवेश) स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके बाद भगवान को ज्वर हो जाता है और वे 15 दिनों तक अनासर गृह में विश्राम करते हैं।


उन्होंने बताया कि इस दौरान भगवान का विशेष उपचार किया जाता है। आषाढ़ अमावस्या के दिन नेत्रोत्सव एवं नवयौवन दर्शन के बाद भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ भव्य रथयात्रा पर मौसी मां मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे।
आध्यात्मिक आस्था का अनूठा संगम
देव स्नान पूर्णिमा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान और भक्तों के बीच गहरे भावनात्मक संबंध का प्रतीक माना जाता है। भगवान का स्नान, उनका अस्वस्थ होना, उपचार और फिर नवयौवन रूप में पुनः दर्शन देना जीवन के उतार-चढ़ाव और पुनर्जीवन का संदेश देता है। यही कारण है कि जगन्नाथ भक्तों के लिए देव स्नान पूर्णिमा और इसके बाद होने वाली रथयात्रा का विशेष महत्व है।