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Internal infighting in the TMC escalates; a second meeting by the dissident faction poses a new challenge for Mamata Banerjee.
कोलकाता। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी विवाद गहराता नजर आ रहा है। ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता के पूर्व पार्षदों के साथ एक और बैठक कर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इसके जवाब में पार्टी के कालीघाट गुट ने बागियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
बैठक में लगाए गए बैनर और साइनबोर्ड पर टीएमसी का चुनाव चिह्न 'घास और दो फूल' तथा पार्टी का नाम तो मौजूद था, लेकिन कहीं भी ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं दिखाई दी। इसे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्वी कोलकाता के टोपसिया स्थित एक निजी बैंक्वेट हॉल में आयोजित बैठक में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के 47 पूर्व पार्षद शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आगामी विधानसभा और संभावित नगर निकाय चुनावों को लेकर रणनीति तैयार करना तथा शहर में संगठन को मजबूत करना था। इससे पहले 22 जून को न्यू टाउन के एक होटल में भी इसी तरह की बैठक आयोजित की गई थी।
टीएमसी की संयुक्त राष्ट्रीय सचिव डोला सेन ने न्यू टाउन और प्रगति मैदान थानों में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि बागी गुट ने पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम का अनुचित इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की। शिकायत में फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक संदेश प्रसारित करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
8 जून को कोलकाता नगर निगम का बोर्ड भंग कर दिया गया था। मेयर फरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद निगम की जिम्मेदारी प्रशासक को सौंप दी गई। हालांकि, बागी गुट की बैठक में फरहाद हकीम शामिल नहीं हुए।
बागी विधायक संदीपन साहा ने दावा किया कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है और वे विधानसभा में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया जा चुका है और जल्द ही राजनीतिक कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी।बैठक में बागी नेता ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों मौजूद रहे। दोनों को पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी से निष्कासित किया जा चुका है।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की ताकत उसके चुनाव चिह्न से नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के नेतृत्व से है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता का जनादेश आज भी ममता बनर्जी के साथ है और कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने से टीएमसी के जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।