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Preparations to turn Cooperative Week into a mass movement
दुर्ग। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक देशभर में सहकारिता सप्ताह मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाने की तैयारी की गई है। प्रदेश की 2573 पैक्स (PACS) समितियों, दुग्ध, मत्स्य, बुनकर तथा अन्य सहकारी संस्थाओं के माध्यम से गांव-गांव तक सहकारिता की योजनाओं को पहुंचाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसी क्रम में आयोजित सहकारिता झंडा रोहण कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने कहा कि सहकारिता सप्ताह का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि सहकारिता को जनआंदोलन का स्वरूप देना है, ताकि अधिक से अधिक किसान और ग्रामीण सहकारी व्यवस्था से जुड़ सकें।
सहकारिता मंत्रालय के गठन को बताया ऐतिहासिक फैसला
प्रीतपाल बेलचंदन ने कहा कि भारत में सहकारिता कानून तो वर्ष 1960 में बन गया था, लेकिन लंबे समय तक सहकारिता स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर सकी और कृषि मंत्रालय के अधीन संचालित होती रही।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को इसकी जिम्मेदारी मिलने के बाद सहकारिता क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार हुआ। उन्होंने इसे भारतीय गणतंत्र के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे देश में सहकारिता सप्ताह मनाया जा रहा है।
402 पैक्स समितियों में हुआ ध्वजारोहण
बेलचंदन ने बताया कि दुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत आने वाले दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों की 402 पैक्स समितियों में 29 जून को सहकारी ध्वजारोहण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। अब 6 जुलाई तक पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार विभिन्न गतिविधियां संचालित होंगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में सहकारिता सप्ताह को सफल बनाने के लिए विभागीय अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह सक्रिय हैं।
'सहकार से समृद्धि' के मंत्र को करेंगे साकार
अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंत्रालय गठन के बाद "सहकार से समृद्धि" तथा "बिन संस्कार नहीं सहकार, बिन सहकार नहीं उद्धार" का जो संदेश दिया है, उसे धरातल पर उतारने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सहकारिता भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की भावना से जुड़ी व्यवस्था है। इसी सोच के साथ सहकारिता को प्रत्येक गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
हर ग्राम पंचायत तक पहुंचेगी सहकारिता
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बेलचंदन ने कहा कि सप्ताहभर चलने वाले कार्यक्रमों के दौरान प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक सहकारी योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो लोग अब तक सहकारी समितियों से नहीं जुड़े हैं, उन्हें भी सदस्य बनाकर सहकारिता की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा, ताकि वे सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकें।
धान खरीदी के साथ दुग्ध और मत्स्य समितियों को भी मिलेगा बढ़ावा
उन्होंने कहा कि प्रदेश में धान खरीदी व्यवस्था के कारण पैक्स समितियां मजबूत हुई हैं। अब दुग्ध सहकारी समितियों और मत्स्य सहकारी समितियों को भी उसी तरह सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सके।
कंप्यूटरीकरण में अव्वल है दुर्ग बैंक
प्रीतपाल बेलचंदन ने कहा कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग कंप्यूटरीकरण के मामले में प्रदेश में अग्रणी रहा है। पैक्स समितियों के डिजिटलीकरण में भी बैंक ने बेहतर कार्य किया है। आने वाले समय में पैक्स समितियों को और अधिक आधुनिक एवं व्यवस्थित बनाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बैंक के सीईओ एस.के. वर्मा और पूरी अधिकारी टीम इस दिशा में लगातार काम कर रही है ताकि किसानों को पारदर्शी और बेहतर सेवाएं मिल सकें।
पांच लाख किसान परिवारों को मिलेगा लाभ
बेलचंदन ने बताया कि दुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से जुड़े दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिलों के लगभग पांच लाख किसान परिवार इस अभियान से लाभान्वित होंगे। सहकारिता सप्ताह के दौरान आयोजित शिविर, सदस्यता अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और सहकार मेलों के माध्यम से किसानों को नई योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।