

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

PM Modi's historic address to the Seychelles Parliament: India-Seychelles ties are not 50, but 256 years old.
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए भारत और सेशेल्स के ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊंचाई दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दुनिया भले ही सेशेल्स को हिंद महासागर में बसे छोटे-छोटे द्वीपों का समूह मानती हो, लेकिन भारत के लिए यह केवल द्वीप नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और करीबी साझेदार है। इसके साथ ही वह सेशेल्स की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बन गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल पिछले 50 वर्षों तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इन रिश्तों की नींव वर्ष 1770 में पड़ी थी, जब पांच भारतीय पहली बार इस द्वीपीय देश पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों को जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु है और यही साझा समुद्री विरासत दोनों देशों की मित्रता की आधारशिला है।
पीएम मोदी ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भारत और सेशेल्स की सोच समान है। उन्होंने दोहराया कि भारत सेशेल्स की संप्रभुता और सुरक्षा का हमेशा विश्वसनीय सहयोगी बना रहेगा। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की नौसेना, तटरक्षक बल और समुद्री एजेंसियां कई दशकों से मिलकर काम कर रही हैं और यह सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री ने मार्च 2025 में प्रस्तुत भारत के 'महासागर' (MAHASAGAR) दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ समुद्री सुरक्षा, विकास और सहयोग को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि भारत छोटे द्वीपीय देशों के साथ साझेदारी को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण, विशेषकर छोटे द्वीपीय देश, जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े प्रभावों का सामना कर रहे हैं। समुद्र तटों का क्षरण, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव और मौसम की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु कार्रवाई निष्पक्षता, समानता और साझा जिम्मेदारी के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। जिन देशों का जलवायु परिवर्तन में योगदान सबसे कम रहा है, उन पर इसका सबसे अधिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' सम्मान से नवाजा था। वहीं मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें 'एग्रीकोला मेडल' प्रदान किया। इसके अलावा उन्हें अब तक 34 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है।
प्रधानमंत्री सोमवार को सेशेल्स की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरी पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद था और अब स्वर्ण जयंती समारोह में आईएनएस तरकश तथा आईएनएस इक्षक इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बन रहे हैं।
सेशेल्स की प्रथम महिला वेरोनिक ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने समय-समय पर विकास, सहयोग और क्षमता निर्माण के माध्यम से सेशेल्स का निरंतर समर्थन किया है, जिसे देश हमेशा याद रखेगा।