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Dhar Bhojshala case: ASI report hints at 'demolition of temple and construction of mosque'
धार। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित धार भोजशाला विवाद मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हुई नियमित सुनवाई के दौरान मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया। “हिंदू फ्रेंड फॉर जस्टिस” की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 98 दिनों तक चली सर्वे रिपोर्ट को लेकर विस्तृत बहस हुई।
ASI ने कोर्ट में रखीं “मेजर फाइंडिंग्स”
सुनवाई के दौरान ASI के अधिवक्ता ने अपनी 10 वॉल्यूम की विस्तृत रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि सर्वे में मिले साक्ष्य इस ओर संकेत करते हैं कि वर्तमान संरचना मूल रूप से एक मंदिर थी, जिसे बाद में परिवर्तित कर मस्जिद का स्वरूप दिया गया। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्राचीन शिलालेख, मूर्तियां, सिक्के और अन्य ऐतिहासिक अवशेष शामिल हैं। ASI ने दावा किया कि इन सभी का वैज्ञानिक और ऐतिहासिक विश्लेषण किया गया है।
शिलालेखों में मंदिर क्षति के संकेत
ASI की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कुछ शिलालेखों में यह उल्लेख होने का दावा किया गया है कि मुगल आक्रांताओं के हमलों के दौरान मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि मंदिर की सामग्री का उपयोग कर बाद में संरचना को बदला गया। एजेंसी ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सर्वे से जुड़े वीडियो रिकॉर्डिंग का एक्सेस भी सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दिया है।
राजा भोज काल से जुड़ा बताया गया स्मारक
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि विवादित स्मारक 10वीं–11वीं शताब्दी का है और इसका संबंध राजा भोज के शासनकाल से माना जा रहा है। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि यह स्थान कभी मां सरस्वती के मंदिर और संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था। हिंदू पक्ष ने अदालत में कहा कि ASI की रिपोर्ट ने उनके लंबे समय से किए जा रहे दावों को और मजबूती प्रदान की है।
कोर्ट कर रहा रिपोर्ट और साक्ष्यों का परीक्षण
फिलहाल हाईकोर्ट पूरे मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, सर्वे रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों का गहन परीक्षण कर रहा है। मामले की आगामी सुनवाई में ASI रिपोर्ट के निष्कर्षों पर और विस्तार से बहस होने की संभावना है।