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रायपुर: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण में एक और बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। राजनांदगांव जिले के देवदा और टेंडेसरा गांवों के साथ-साथ दुर्ग जिले के पाटन तहसील के ग्राम फूंडा में सड़क दायरे से बाहर की जमीनों को अधिग्रहण में शामिल कर करोड़ों रुपये का मुआवजा बांट दिया गया।
जानकारी के मुताबिक देवदा और टेंडेसरा गांवों में सड़क से तीन किलोमीटर दूर तक स्थित जमीनों को भी अधिग्रहण में लिया गया। इतना ही नहीं, करीब 52 एकड़ ऐसी भूमि भी चिन्हांकित की गई, जहां से प्रस्तावित सड़क गुजरती ही नहीं है। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद राजस्व विभाग के सामने रिकॉर्ड सुधार और नक्शा मिलान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि भारतमाला परियोजना के तहत सिक्स लेन सड़क के लिए केवल 90 मीटर चौड़ी भूमि का अधिग्रहण किया जाना था, लेकिन नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर अतिरिक्त जमीनों को शामिल किया गया। इस पूरे मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
राजनांदगांव के देवदा गांव में 77 खसरों को अधिग्रहण में शामिल किया गया, जिनमें कई जमीनें सड़क से 100 मीटर से लेकर तीन किलोमीटर दूर तक स्थित हैं। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों की जमीनों को प्राथमिकता देकर अधिग्रहण किया गया। यहां करीब 33 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया।
इसी तरह टेंडेसरा गांव में 42 खसरों को शामिल कर करीब 29 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि ये जमीनें सड़क से 50 मीटर से लेकर दो किलोमीटर दूर तक थीं। वहीं दुर्ग जिले के फूंडा गांव में 14 खसरों पर लगभग 12 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया, जो सड़क परियोजना के दायरे से बाहर थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। शिकायतकर्ता कृष्णकुमार साहू को ईडी कार्यालय बुलाकर उनसे जुड़े दस्तावेज और जानकारी ली गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि सभी जरूरी साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंप दिए गए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद इस मुआवजा घोटाले में शामिल अधिकारियों और अन्य जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।