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ED raids seven locations: Satpal Chhabra arrested in DMF scam, Utkarsh Chandrakar in CGPSC case.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कथित CGPSC भर्ती घोटाले और DMF घोटाले से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। ED ने CGPSC घोटाले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर और DMF घोटाले के आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को रायपुर स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां जांच एजेंसी ने आगे की पूछताछ के लिए कस्टोडियल रिमांड की मांग की है।
ED की इस कार्रवाई के साथ ही प्रदेश में एक बार फिर CGPSC भर्ती में कथित गड़बड़ी और DMF से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
7 ठिकानों पर ED की छापेमारी
मंगलवार को ED की टीम ने छत्तीसगढ़ में करीब 7 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन PA रहे केके चंद्रवंशी, पूर्व OSD चेतन बोरघारिया और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत से जुड़े ठिकाने शामिल हैं।
दुर्ग जिले में भी ED की टीम ने दो स्थानों पर जांच की। कार्रवाई के दौरान दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य जरूरी सामग्रियों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सुबह 6 बजे केके चंद्रवंशी के घर पहुंची टीम
भिलाई के विश्व बैंक कॉलोनी क्षेत्र में ED की टीम सुबह करीब 6 बजे 2-3 गाड़ियों से पहुंची। यहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के PA रहे केके चंद्रवंशी के घर पर टीम ने जांच शुरू की।
ED अधिकारियों ने घर के अंदर मौजूद दस्तावेजों और अन्य जरूरी सामानों की पड़ताल की। कार्रवाई के दौरान घर के बाहर सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।
कमलेश राजपूत के घर भी पहुंची ED
दुर्ग के सिकोला भाठा स्थित बंगाली कॉलोनी में पूर्व पटवारी और पटवारी संघ के प्रदेश पदाधिकारी रह चुके कमलेश सिंह राजपूत के घर भी ED की टीम पहुंची।
बताया गया कि करीब 8 ED अधिकारी दो वाहनों से उनके घर पहुंचे और दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान परिवार के सदस्यों की सरकारी पदों पर नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं को भी खंगाले जाने की बात सामने आई है।
राजपूत के परिवार में उनकी दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उप-पंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। हालांकि, ED की ओर से इस कार्रवाई के संबंध में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पूर्व OSD चेतन बोरघारिया के दो ठिकानों पर कार्रवाई
ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD रहे चेतन बोरघारिया से जुड़े दो ठिकानों पर भी कार्रवाई की है।
बोरघारिया वर्तमान में बलरामपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। जानकारी के मुताबिक ED की टीम ने बलरामपुर के सर्किट हाउस में उनसे पूछताछ की। वहीं धमतरी के अमलतास पुरम स्थित उनके घर पर भी टीम ने दस्तावेजों की जांच की।
CGPSC केस में दो अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
इधर CGPSC कथित घोटाले से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को जमानत दे दी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब ED CGPSC मामले में अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच को आगे बढ़ा रही है।
टामन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई कार्रवाई
ED की मौजूदा कार्रवाई को CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की 25 जुलाई को हुई गिरफ्तारी से जोड़कर देखा जा रहा है। सोनवानी को CGPSC परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।
ED की जांच वर्ष 2020 और 2021 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और अवैध लेन-देन के आरोपों से जुड़ी है।
ED ने यह जांच CBI द्वारा 2024 में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी।
ED का क्या आरोप है?
जांच एजेंसी का आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करने में मदद की। इसके बदले रिश्वत लिए जाने और कथित तौर पर इसका लाभ रिश्तेदारों तथा पैसे देने वाले उम्मीदवारों को पहुंचने का आरोप है।
इस मामले में CBI भी पहले कार्रवाई कर चुकी है। करीब दो साल पहले CBI ने टामन सिंह सोनवानी के साथ बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था।
CBI ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP सहित विभिन्न पदों पर चयनित कराने के लिए कथित अवैध लेन-देन के आरोप लगाए थे।
CBI की जांच में पेपर लीक का कथित कनेक्शन
CBI की जांच के मुताबिक, आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी ने परीक्षा का प्रश्नपत्र अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को उपलब्ध कराया था।
इसके बाद जांच में यह आरोप सामने आया कि तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण गोयल को दिया।
CBI के आरोपों के मुताबिक, श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने कथित रूप से इसी लीक प्रश्नपत्र के आधार पर तैयारी की और बाद में दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ।
18 रिश्तेदारों की नियुक्ति का भी आरोप
CBI की जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि सोनवानी के कार्यकाल के दौरान PSC की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रभावशाली लोगों, कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों से जुड़े करीब 18 रिश्तेदारों को विभिन्न पदों पर चयनित कराने में कथित भूमिका की जांच की गई।
CBI ने जांच के दौरान कथित पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत मिलने का भी दावा किया था।
फिलहाल ED की मंगलवार की कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए उत्कर्ष चंद्राकर और सतपाल सिंह छाबड़ा से पूछताछ के बाद मामले में और क्या खुलासे होते हैं, इस पर सबकी नजर है। ED की ओर से छापेमारी और गिरफ्तारियों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद कार्रवाई की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।