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Effect of PM's appeal: VIP convoys reduced in UP-Madhya Pradesh, many states took major decisions to save fuel
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश के कई राज्यों ने ईंधन और विदेशी मुद्रा बचत को लेकर बड़े प्रशासनिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अपील में पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य संसाधनों की खपत कम करने की बात कही गई थी, जिसका असर अब सरकारी तंत्र में साफ दिखाई दे रहा है।
यूपी और एमपी में काफिले में 50 प्रतिशत की कटौती
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में 50 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्णय लिया है। दोनों राज्यों में यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, ताकि ईंधन की खपत कम हो और सरकारी संसाधनों का अधिक जिम्मेदारी से उपयोग हो सके।
मध्य प्रदेश में सीमित वाहनों का उपयोग और साइकिल यात्रा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटा दी है। वहीं सरकारी बैठकों और दौरों के दौरान वाहन रैलियों पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा एक हाई कोर्ट जज द्वारा साइकिल से न्यायालय पहुंचने का उदाहरण भी सामने आया है, जिसने सादगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है।
महाराष्ट्र और गुजरात में भी सख्त निर्देश
महाराष्ट्र में अब मंत्रियों और अधिकारियों को चार्टर्ड विमान या सरकारी विमान के उपयोग से पहले मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हवाई यात्रा छोड़कर अब सड़क और रेल मार्ग से यात्रा करने का निर्णय लिया है।
वीआईपी संस्कृति में बदलाव के संकेत
कई राज्यों में वीआईपी प्रोटोकॉल और काफिले को कम करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली में मंत्री आशीष सूद ने मेट्रो और ई-रिक्शा का उपयोग कर सरकारी कार्यक्रमों में भाग लिया, जो इस बदलते रुझान का प्रतीक माना जा रहा है।
सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल मीटिंग्स पर जोर
सरकारों ने अब बैठकों और कार्यक्रमों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने पर भी जोर देना शुरू किया है। साथ ही सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे मनाने और जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने की सलाह दी जा रही है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों पर फोकस
इन फैसलों को न केवल ईंधन बचत बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक दबाव कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लंबी अवधि में सरकारी खर्च को कम करने में भी मदद करेंगे।