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Electricity becomes costlier in Chhattisgarh for the second time in 13 months... the bill for 300 units has risen from ₹751 to ₹1,172... find out how much the financial burden has increased across different slabs.
रायपुर। रायपुर में बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर पिछले 13 महीनों में दो बार दर बढ़ने का असर दिखाई दे रहा है। खासकर 201 से 400 यूनिट के बीच बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए प्रति यूनिट 50 पैसे तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। इसके साथ ही हाफ-बिल योजना की सीमा में हुए बदलाव ने भी घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत कम कर दी है।जून 2025 में जहां 300 यूनिट बिजली खपत वाले उपभोक्ता का अनुमानित बिल करीब 751 रुपये था, वहीं जुलाई 2026 में यही बिल बढ़कर लगभग 1172 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि इस अंतर की पूरी वजह टैरिफ वृद्धि नहीं है। बिजली की दरों के साथ हाफ-बिल योजना में बदलाव का भी बिल पर असर पड़ा है।
जुलाई 2025 में बिजली दरों में पहली वृद्धि की गई थी। उस समय 0 से 100 यूनिट तक की खपत के लिए दर 4.10 रुपये प्रति यूनिट हो गई थी। 101 से 200 यूनिट वाले उपभोक्ताओं के लिए यह दर 4.20 रुपये और 201 से 400 यूनिट के लिए 5.60 रुपये प्रति यूनिट तय की गई थी।जून 2025 की दरों से तुलना करें तो इन स्लैब में क्रमश: 20 पैसे, 10 पैसे और 10 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई थी।
जुलाई 2026 से लागू नई दरों के मुताबिक 0 से 100 यूनिट की बिजली के लिए अब 4.40 रुपये प्रति यूनिट चुकाने पड़ रहे हैं। 101 से 200 यूनिट के लिए दर 4.50 रुपये और 201 से 400 यूनिट के लिए 6 रुपये प्रति यूनिट हो गई है।यानी जून 2025 की तुलना में 0 से 100 यूनिट के स्लैब में 50 पैसे, 101 से 200 यूनिट में 40 पैसे और 201 से 400 यूनिट में 50 पैसे प्रति यूनिट का अंतर आया है।
300 यूनिट बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता का तुलनात्मक अनुमान देखें तो जून 2025 में बिल करीब 751 रुपये था। अगस्त से नवंबर 2025 के दौरान हाफ-बिल योजना की राहत 100 यूनिट तक सीमित होने से अनुमानित बिल करीब 1323 रुपये तक पहुंचा।दिसंबर 2025 से जून 2026 के बीच हाफ-बिल राहत की सीमा 200 यूनिट तक होने पर यही अनुमानित बिल करीब 1096 रुपये रहा। जुलाई 2026 में नई बिजली दर लागू होने के बाद यह राशि करीब 1172 रुपये हो गई।
300 यूनिट की ऊर्जा लागत जून 2025 के करीब 1350 रुपये के मुकाबले जुलाई 2026 में लगभग 1490 रुपये हो गई। यानी केवल ऊर्जा लागत के स्तर पर करीब 140 रुपये का अंतर दिखाई देता है।हालांकि उपभोक्ता के अंतिम बिल में स्वीकृत भार, वीसीए, विद्युत शुल्क और अन्य मद भी शामिल होते हैं। इसलिए वास्तविक बिल हर उपभोक्ता के लिए अलग हो सकता है।
बिजली की कीमत बढ़ने के साथ ही हाफ-बिल योजना की सीमा में बदलाव भी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण रहा। अलग-अलग अवधि में राहत की सीमा बदलने से 300 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले परिवारों के बिल में अंतर दिखाई दिया।इसी वजह से 300 यूनिट के उदाहरण में जून 2025 से जुलाई 2026 के बीच बिल में हुई पूरी बढ़ोतरी को केवल टैरिफ वृद्धि से जोड़ना सही नहीं होगा।
बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी की है। कांग्रेस का कहना है कि बिजली की बढ़ी दरों से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ा है।कांग्रेस की ओर से प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन के जरिए बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने, स्मार्ट मीटर हटाने और 400 यूनिट तक हाफ-बिल योजना को फिर से लागू करने की मांग उठाने की बात कही गई है।
विद्युत नियामक आयोग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी उपभोक्ता श्रेणियों को मिलाकर औसत टैरिफ वृद्धि 6.23 प्रतिशत है। हालांकि अलग-अलग खपत स्लैब में उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला वास्तविक प्रभाव उनकी बिजली खपत और लागू अन्य शुल्कों के आधार पर अलग हो सकता है।कुल मिलाकर, पिछले 13 महीनों में दो बार हुई दर वृद्धि और हाफ-बिल योजना में बदलाव ने घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के मासिक खर्च को प्रभावित किया है। खास तौर पर 201 से 400 यूनिट की खपत वाले परिवारों के लिए नई दरें पहले की तुलना में अधिक भुगतान का कारण बन रही हैं।