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Employees awaiting regularization... eyes fixed on the government's decision.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अलग अलग विभागों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हजारों कर्मचारी अब भी स्थायी नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण के भरोसे पर लंबे समय तक आंदोलन और संघर्ष किया गया, लेकिन अब तक ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में करीब 10 वर्ष या उससे अधिक समय से काम कर रहे 3,630 कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। इनमें 966 दैनिक वेतनभोगी और 2,664 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल बताए गए हैं।कर्मचारियों का तर्क है कि लंबे समय से विभागीय सेवाओं में योगदान देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। ऐसे में सरकार से नियमों के तहत जल्द फैसला लेने की मांग की जा रही है।
अनियमित कर्मचारियों का कहना है कि 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने नियमितीकरण को प्रमुख मुद्दा बनाया था। सत्ता में आने के बाद इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन कर्मचारी संगठनों के अनुसार अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सका।कांग्रेस ने 2019 में नियमितीकरण से जुड़ी संभावनाओं और नियमों की समीक्षा के लिए समिति का गठन भी किया था। कर्मचारी संगठन अब उसी प्रक्रिया के आधार पर ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बनने से पहले पार्टी ने युवाओं और कर्मचारियों से कई वादे किए थे। उनका सवाल है कि चुनाव के दौरान किए गए नियमितीकरण और रोजगार से जुड़े आश्वासनों का कितना पालन हुआ।उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में हैं, वहीं लंबे समय से काम कर रहे अनियमित कर्मचारियों को भी स्थायित्व का इंतजार है।
भाजपा नेता अनुराग अग्रवाल ने भी कांग्रेस के पुराने घोषणा पत्र और वादों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए। उनका कहना है कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भरोसा दिलाया था। अब सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उस दिशा में कितनी प्रगति हुई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ऊर्जा विभाग में करीब 27 हजार और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में लगभग 25 हजार अनियमित कर्मचारी बताए गए हैं। स्वास्थ्य, परिवार कल्याण विभाग में करीब 9 हजार, सहकारिता विभाग में 7,600 और वाणिज्यिक कर विभाग में लगभग 7,500 कर्मचारियों के अनियमित श्रेणी में होने की जानकारी दी गई है।इनके अलावा स्कूल शिक्षा, लोक निर्माण, आवास, समाज कल्याण और अन्य विभागों में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी नियमितीकरण की उम्मीद कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार विभागवार स्थिति की समीक्षा कर नियमितीकरण के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करे। वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार और सेवा सुरक्षा का मुद्दा अब भी प्रमुख बना हुआ है। नियमितीकरण को लेकर सरकार की अगली पहल पर कर्मचारियों और राजनीतिक दलों दोनों की नजर है।