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Escalating dispute at the 'paper leak' protest venue... Questions raised over the presence of political and controversial figures at the CJP demonstration.
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस आंदोलन के मंच का इस्तेमाल केवल छात्रों के मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई राजनीतिक और विवादित चेहरे भी यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।प्रदर्शन से जुड़े लोगों के अनुसार, आंदोलन का मूल मुद्दा परीक्षा में गड़बड़ी और छात्रों की मांगें हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसमें राजनीतिक रंग भी दिखाई देने लगा है। कई विपक्षी दलों के नेता भी इस मंच पर पहुंच रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली दंगे के आरोपित उमर खालिद के पिता और प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के संस्थापक सैयद कासिम रसूल इलियास भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे।इसके अलावा कुछ अन्य चर्चित और विवादित चेहरों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों और संगठनों का कहना है कि ऐसे लोगों की भागीदारी से आंदोलन की मूल भावना प्रभावित हो सकती है।
कॉमेडियन कुणाल कामरा के मंच से दिए गए बयान को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने मंच से हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिस पर कुछ संगठनों ने विरोध जताया।विरोध करने वालों का कहना है कि छात्रों के मुद्दे से जुड़े आंदोलन में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली बातें नहीं होनी चाहिए।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट भी अब चर्चा का विषय बन गए हैं। विरोध करने वालों ने उनके कुछ पुराने पोस्ट साझा किए हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का विरोध किया गया था।वहीं, उनके एक सहयोगी अर्पित शर्मा को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ पिछले वर्ष बुलंदशहर में मामला दर्ज किया गया था।
जंतर-मंतर पर मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि प्रदर्शन की शुरुआत नीट पेपर लीक और परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर हुई थी, लेकिन अब इसमें राजनीतिक गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।कुछ छात्रों और अभिभावकों ने ऐसे माहौल को देखते हुए प्रदर्शन से दूरी बनानी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि आंदोलन का फोकस छात्रों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर ही रहना चाहिए।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों का आरोप है कि कई विपक्षी नेता इस मंच का उपयोग अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। हालांकि, सीजेपी से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका आंदोलन छात्रों की आवाज उठाने के लिए है और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है।नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब परीक्षा सुधार के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।