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Latest News: Fake doctor arrested in Kanpur, 12th pass kingpin was running kidney transplant racket, accused had a reward of 25 thousand rupees.
कानपुर। कानपुर में किडनी खरीद-फरोख्त और अवैध ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने सोमवार को 25 हजार रुपये के इनामी कथित डॉक्टर रोहित तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। खुद को एनेस्थीसिया विशेषज्ञ बताने वाला रोहित दरअसल सिर्फ 12वीं पास निकला।
गाजियाबाद समेत NCR में चल रही थी तलाश, कोर्ट के बाहर दबोचा गया
कई दिनों से गाजियाबाद और एनसीआर के अन्य जिलों में उसकी तलाश चल रही थी। सोमवार सुबह वह कानपुर में कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए वकील से मिलने पहुंचा था, जहां पुलिस ने उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी से पहले उसने सबूत मिटाने के लिए बैराज पहुंचकर अपने दो मोबाइल फोन गंगा नदी में फेंक दिए थे।
हर ट्रांसप्लांट में 20 से 30 लाख की वसूली
पूछताछ में सामने आया कि रोहित अब तक करीब 30 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करा चुका है। वह अस्पतालों और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) टीम का प्रबंधन करता था। हर ट्रांसप्लांट के लिए 20 से 30 लाख रुपये वसूले जाते थे, जबकि बाकी रकम दलालों में बंटती थी। चौंकाने वाली बात यह है कि एनेस्थीसिया का इंजेक्शन खुद रोहित नहीं, बल्कि ओटी मैनेजर राजेश और इंचार्ज कुलदीप देते थे।
वार्ड बॉय से बना गिरोह का सरगना
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, रोहित के साथ अफजाल और मुद्दसर अली खान उर्फ अली पर भी 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। रोहित की शुरुआत 2018 में मेरठ के एक क्लीनिक में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर हुई थी। बाद में वह अल्फा अस्पताल में वार्ड बॉय बना, जहां उसने किडनी ट्रांसप्लांट के अवैध नेटवर्क को करीब से देखा और इसमें शामिल हो गया।
कानपुर में फैला नेटवर्क, कई सहयोगी फरार
2019 में मेरठ में ट्रांसप्लांट का काम बंद होने के बाद उसे इस धंधे में बड़ी कमाई का लालच देकर कानपुर भेजा गया। यहां 2022 में उसकी मुलाकात प्रयागराज के दलाल नवीन पांडेय और एंबुलेंस चालक शिवम से हुई, जिसके बाद गिरोह सक्रिय हो गया।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।