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Farmers troubled by stray cattle stage a unique protest... they herded 110 animals to the Collectorate... and pleaded for help to save their crops.
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के अंबिकापुर में आवारा मवेशियों से परेशान किसानों ने गुरुवार को ऐसा विरोध प्रदर्शन किया, जिसने प्रशासन को भी चौंका दिया। परसाभकुरा गांव के करीब 40 किसान लगभग 110 आवारा मवेशियों को 15 किलोमीटर तक हांकते हुए सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए और कलेक्टर कार्यालय के बाहर छोड़ दिया। अचानक इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों के पहुंचने से परिसर में अफरा-तफरी मच गई और अधिकारी किसानों को समझाने में जुट गए।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि धान की फसल अभी तैयार भी नहीं हुई है, लेकिन आवारा मवेशी खेतों में घुसकर लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों के मुताबिक उनके पास इतनी आर्थिक क्षमता नहीं है कि वे पूरे खेत की घेराबंदी करा सकें। उनका कहना है कि खेती ही परिवार की आजीविका का एकमात्र सहारा है और यदि फसल इसी तरह नष्ट होती रही तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों ने आरोप लगाया कि शहर में पकड़े गए आवारा मवेशियों को गांवों के आसपास छोड़ दिया जाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या और बढ़ रही है। उनका कहना है कि गांव के किसान अपने मवेशियों को बांधकर रखते हैं, जबकि बाहर से छोड़े गए पशु खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालांकि नगर निगम के पशु विभाग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने किसानों की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि इस मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए योजना बनाई जा रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं और जल्द प्रभावी व्यवस्था लागू करने का आश्वासन दिया है।
उधर धमतरी जिले में नेशनल हाईवे-30 पर तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से चार मवेशियों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद हाईवे पेट्रोलिंग टीम ने शवों को हटाकर दफनाने की व्यवस्था कराई। स्थानीय किसानों के अनुसार मृत पशु दुधारू थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हुआ है।
आवारा पशुओं से बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे और शहरों की प्रमुख सड़कों से पशुओं को हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने संयुक्त अभियान चलाकर पशुओं को गौशालाओं और कैटल पाउंड में भेजने, 24 घंटे हाईवे पेट्रोलिंग, स्थायी हेल्पलाइन की व्यवस्था और आदेशों का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा है। साथ ही आठ सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।