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Trading guns for a path of skill, former female Naxalites walked the ramp in Raipur.
रायपुर। छत्तीसगढ़ से बदलाव और उम्मीद की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान खींचा। कुछ महीने पहले तक जिन महिलाओं के कंधों पर बंदूक हुआ करती थी, वही महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कदमताल करती नजर आईं। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटी इन पूर्व महिला नक्सलियों ने पारंपरिक हथकरघा और कोसा सिल्क के परिधानों में रैंप वॉक कर अपनी नई पहचान की झलक दिखाई।
रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में नेशनल हैंडलूम डे के राज्य स्तरीय बुनकर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसी कार्यक्रम में आत्मसमर्पण कर चुकीं 9 पूर्व महिला नक्सलियों को रैंप वॉक का अवसर दिया गया।
इनमें सुकमा की 8 और बीजापुर की एक महिला शामिल थीं। पारंपरिक हथकरघा और कोसा सिल्क से तैयार परिधानों में सजी इन महिलाओं ने मॉडल्स की तरह रैंप पर कदम रखा। उनके साथ फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन भी रैंप पर नजर आईं।
बस्तर के घने जंगलों में कभी हथियार लेकर चलने वाली इन महिलाओं की जिंदगी अब पूरी तरह बदलने की राह पर है। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
रैंप पर उतरने के दौरान दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। यह सिर्फ एक फैशन शो नहीं था, बल्कि हिंसा से शांति और जंगल से मुख्यधारा तक के सफर को दिखाने वाला एक संदेश भी था।
सुकमा के चिंतागुफा क्षेत्र के एल्मागुंडा गांव की 22 वर्षीय पुनेम ज्योति के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। ज्योति ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनकी जिंदगी में ऐसा दिन आएगा।
ज्योति ने पिछले साल दिसंबर में हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने हिंदी और गोंडी में बातचीत करते हुए बताया कि माओवादी आंदोलन छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है।
28 वर्षीय एक अन्य पूर्व महिला नक्सली ने बताया कि उन्होंने इससे पहले कभी फैशन शो नहीं देखा था। माओवादी संगठन के सांस्कृतिक विभाग से जुड़ी होने के कारण उन्हें दर्शकों के सामने प्रस्तुति देने का थोड़ा अनुभव जरूर था, जिसने रैंप वॉक में उनकी मदद की।
उन्होंने कहा कि हिंसा छोड़ने के बाद अब वे शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जिंदगी जी रही हैं। उनके लिए रैंप पर चलना अपने पुराने जीवन से निकलकर एक नई पहचान की ओर बढ़ने जैसा अनुभव था।
कार्यक्रम में फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन ने भी हिस्सा लिया। पूर्व महिला नक्सलियों ने उनके साथ कदम से कदम मिलाकर रैंप वॉक किया। हथकरघा से तैयार पारंपरिक परिधानों में इन महिलाओं का आत्मविश्वास देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों से उनका हौसला बढ़ाया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और अन्य लोग मौजूद रहे। पूर्व महिला नक्सलियों के रैंप वॉक के दौरान मुख्यमंत्री साय ने भी उनका उत्साह बढ़ाया।
इन महिलाओं की कहानी सिर्फ एक फैशन शो तक सीमित नहीं है। यह उस बदलाव की तस्वीर है, जिसमें आत्मसमर्पण के बाद हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन और रोजगार के अवसर देने की कोशिश की जा रही है।
अब इन महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती आत्मनिर्भर बनने की है। प्रशिक्षण, हुनर विकास और रोजगार के अवसर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नक्सलवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुकी इन महिलाओं को समाज में स्थायी जगह दिलाने के लिए केवल आत्मसमर्पण पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।