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Former PSC Chairman suffers major setback from High Court: Demand for additional pension rejected, court pronounces important verdict!
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग यानी पीएससी के पूर्व चेयरमैन आरएस विश्वकर्मा को अतिरिक्त पेंशन देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि नियमों के तहत वे अतिरिक्त पेंशन पाने के पात्र नहीं हैं और सरकार को पुराने नियमों को पिछली तारीख से लागू करने का निर्देश भी नहीं दिया जा सकता।
रिटायरमेंट के समय पहले से मिल रही थी अधिक पेंशन
जानकारी के अनुसार आरएस विश्वकर्मा राज्य सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी पद पर कार्यरत थे और 31 जनवरी 2015 को सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के समय उनकी वार्षिक पेंशन 11.59 लाख रुपये निर्धारित की गई थी।इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का सदस्य बनाया गया और बाद में वे पीएससी चेयरमैन बने। उन्होंने 16 जनवरी 2017 को चेयरमैन पद से भी सेवानिवृत्ति ली।
सातवें वेतन आयोग के बाद बढ़ाई गई थी पेंशन सीमा
बाद में राज्य सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर पीएससी सदस्यों और चेयरमैन की पेंशन सीमा में बदलाव किया। पहले यह अधिकतम सीमा 4.80 लाख रुपये सालाना थी, जिसे 5 दिसंबर 2020 के संशोधन के बाद बढ़ाकर 13.50 लाख रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया।सरकार ने इस संशोधन को 1 अप्रैल 2018 से प्रभावी माना था।
पूर्व चेयरमैन ने मांगा था संशोधित नियमों का लाभ
आरएस विश्वकर्मा ने अपनी याचिका में मांग की थी कि उन्हें भी अन्य पूर्व पीएससी सदस्यों और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन की तरह अतिरिक्त पेंशन का लाभ दिया जाए।उन्होंने तर्क दिया कि संशोधित नियमों का फायदा उन्हें भी मिलना चाहिए, लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा- उस समय के नियमों से होगा फैसला
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब आरएस विश्वकर्मा पीएससी चेयरमैन पद से रिटायर हुए थे, उस समय लागू नियमों के अनुसार अधिकतम पेंशन सीमा 4.80 लाख रुपये सालाना थी। जबकि उन्हें पहले से ही 11.59 लाख रुपये सालाना पेंशन मिल रही थी।ऐसी स्थिति में वे अतिरिक्त पेंशन पाने के पात्र नहीं बनते।
सरकार को पिछली तारीख से नियम लागू करने का निर्देश नहीं
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2020 में किए गए संशोधन को 1 जनवरी 2016 से लागू करने के लिए सरकार को बाध्य नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए अतिरिक्त पेंशन की मांग को अस्वीकार कर दिया।