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Unused government lands in Chhattisgarh will be rejuvenated; the government has prepared a redevelopment action plan.
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशभर में शासकीय विभागों, निगम-मंडलों, कंपनियों और बोर्डों की अनुपयोगी एवं खाली पड़ी जमीनों के व्यवस्थित विकास और बेहतर उपयोग के लिए व्यापक रिडेव्हलपमेंट कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव विकास शील ने की। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों से चिन्हित सरकारी भूमि की स्थिति और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि वर्षों से खाली पड़ी सरकारी जमीनों से न तो शासन को राजस्व मिल रहा है और न ही जनता को उसका लाभ मिल पा रहा है। नई रिडेव्हलपमेंट योजना से शहरों के नियोजित विकास के साथ-साथ सरकारी परिसंपत्तियों का मूल्य भी कई गुना बढ़ेगा।
डिजिटल लैंड बैंक और GIS मैपिंग से होगी निगरानी
सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी अनुपयोगी और अतिक्रमण की आशंका वाली सरकारी जमीनों की पहचान कर उनका व्यावसायिक एवं जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए एक केंद्रीय डिजिटल लैंड बैंक तैयार किया जाएगा।
जीआईएस मैपिंग के माध्यम से हर प्लॉट की सटीक लोकेशन, क्षेत्रफल और वर्तमान स्थिति का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे जमीनों की निगरानी और प्रबंधन अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकेगा।
प्राइम लोकेशन पर बनेंगे आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट
शहरी क्षेत्रों में प्रमुख स्थानों पर स्थित खाली जमीनों पर आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, पार्किंग सुविधा और नए सरकारी कार्यालय विकसित किए जाएंगे। बड़ी परियोजनाओं के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और कौशल विकास को बढ़ावा
ग्रामीण इलाकों की सरकारी जमीनों का उपयोग कृषि, उद्यानिकी, आधुनिक वेयरहाउस और स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने के लिए किया जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
जर्जर भवनों को हटाकर होंगे आधुनिक निर्माण
योजना के तहत ऐसे शासकीय भवनों और परिसरों की पहचान की जाएगी जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और जिनकी मरम्मत आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। इन भवनों को हटाकर उनकी जगह आधुनिक और बहुउद्देशीय सरकारी भवनों का निर्माण किया जाएगा।
अवैध कब्जे रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम
सरकार ने जमीनों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। चिन्हित जमीनों की तत्काल फेंसिंग कर वहां शासकीय स्वामित्व के बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही अवैध कब्जों को रोकने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे।
वरिष्ठ अधिकारी और कलेक्टर हुए शामिल
बैठक में विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त अवनीश शरण तथा एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी संभागायुक्त और कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।