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Four accused arrested following raids across three states for a ₹1.15 crore fraud involving the lure of making millions through share trading.
रायपुर। कम समय में शेयर बाजार से भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का रायपुर रेंज साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में तीन अलग-अलग मामलों में कुल 1.15 करोड़ रुपये की साइबर ठगी सामने आई है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गुजरात के शुभम चौहान और साबले प्रेम विश्वास, मध्यप्रदेश के कटनी निवासी अनुज सेन तथा महाराष्ट्र के गोंदिया निवासी विक्की राहंगडाले के रूप में हुई है। पुलिस ने चारों को रायपुर लाकर पूछताछ शुरू कर दी है।
पहला मामला पलारी क्षेत्र के डागेश चंद्राकर से जुड़ा है। साइबर ठगों ने उन्हें शेयर ट्रेडिंग में निवेश कर कम समय में बड़ी रकम कमाने का भरोसा दिलाया। अलग-अलग चरणों में उनसे करीब 69 लाख रुपये जमा करा लिए गए।जब निवेश के बदले promised मुनाफा नहीं मिला और आरोपियों से संपर्क टूट गया, तब डागेश ने पुलिस से शिकायत की। बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल के बाद पुलिस सूरत पहुंची, जहां से शुभम चौहान और साबले प्रेम विश्वास को गिरफ्तार किया गया।जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी कंपनियों और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर बनाए गए बैंक खातों में ठगी की रकम जमा करवाते थे। इस नेटवर्क से जुड़ी 20 से अधिक शिकायतों की भी जानकारी पुलिस को मिली है।
दूसरे मामले में भाटापारा निवासी मुकेश विश्वकर्मा को शेयर बाजार में निवेश से मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 12 लाख रुपये की ठगी की गई।लेनदेन और बैंक खातों की जांच में कटनी निवासी अनुज सेन की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार अनुज जबलपुर और इंदौर में फर्जी कंपनियां तैयार करता था। इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें गिरोह के दूसरे सदस्यों को उपलब्ध कराया जाता था। इन्हीं खातों में साइबर ठगी से हासिल रकम पहुंचाई जाती थी।पुलिस ने अनुज सेन को जबलपुर से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में फर्जी कंपनियों और बैंक खातों की व्यवस्था करने में उसकी भूमिका सामने आने का दावा किया गया है।
तीसरे मामले में मंदिर हसौद निवासी वेदप्रकाश बघेल को शेयर ट्रेडिंग से भारी लाभ का झांसा देकर 34 लाख रुपये की ठगी की गई।तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को महाराष्ट्र के गोंदिया निवासी विक्की राहंगडाले की भूमिका का पता चला। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने फर्जी कंपनी और सिम कार्ड के जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर जयपुर में फर्जी बैंक खाते तैयार करवाए थे। इन्हीं खातों में ठगी की रकम मंगाई गई।
गिरोह में हर सदस्य की अलग जिम्मेदारी, कोई खाता तो कोई सिम उपलब्ध कराता था, जांच में सामने आया कि यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क की तरह काम करता था। इसके सदस्यों के बीच काम बांटा गया था। कुछ आरोपी फर्जी कंपनियां बनाते थे, जबकि दूसरे उन्हीं कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे।कुछ सदस्य फर्जी सिम और बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करते थे। इन खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए पीड़ितों से संपर्क किया जाता और शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर रकम जमा कराई जाती थी। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर निकाल लिया जाता था।
रायपुर रेंज साइबर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया। ठगी की रकम किन खातों में पहुंची और वहां से किन खातों में ट्रांसफर हुई, इसकी कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची।इसके बाद मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी और चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
राजधानी में साइबर अपराध की एक बड़ी चुनौती यह भी है कि ठगी के हर मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो पाती। उपलब्ध पुलिस आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष करीब चार हजार लोग साइबर ठगी के शिकार हुए, लेकिन इनमें केवल 102 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। बड़ी संख्या में शिकायतें साइबर क्राइम पोर्टल तक ही सीमित रह गईं।
पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 470 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य ठगों के अलावा सिम कार्ड और म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोग, बैंक कर्मचारी और टेलीकॉम क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल रहे हैं।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और मोबाइल की जांच में ठगी से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी भी मिली है। आरोपियों के खिलाफ कई राज्यों में मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। अब पुलिस इनसे जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।साथ ही ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों को होल्ड कराने की कार्रवाई भी की जा रही है, ताकि रकम की आगे निकासी रोकी जा सके।
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा के मुताबिक शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को फंसाने वाले साइबर नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई और तीन राज्यों में अभियान चलाकर गिरफ्तारियां की गईं। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।