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Health issues rise after rains; every fifth patient at the Medicine OPD is suffering from vomiting and diarrhea, while cases of cold, cough, and viral infections have also increased.
रायपुर। बारिश के बाद बढ़ी उमस और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। राजधानी के अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में उल्टी-दस्त, पेट दर्द, कमजोरी, बुखार और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। आंबेडकर अस्पताल में सोमवार को मेडिसिन ओपीडी में करीब 700 मरीज पहुंचे। इनमें लगभग हर पांचवां मरीज उल्टी-दस्त या पेट से जुड़ी समस्या से पीड़ित बताया गया।जिला अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने से मेडिसिन वार्ड पर दबाव बढ़ गया है। कई जगह बेड की कमी के कारण मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में ही दो से तीन दिन तक रखने की स्थिति बन रही है।
चिकित्सकों के मुताबिक मानसून के दौरान दूषित पानी और संक्रमित खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के बाद उमस बढ़ने से खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो सकते हैं। खुले में रखे भोजन, कटे फल और साफ-सफाई की कमी भी संक्रमण का कारण बन सकती है।इस समय बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। वायरल संक्रमण के कारण बुखार, गले में खराश, सर्दी और खांसी के मरीज भी बढ़े हैं।
अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ गंभीर रोगियों को भर्ती करने की जरूरत भी बढ़ी है। मेडिसिन वार्ड में बेड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कुछ मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में निगरानी में रखना पड़ रहा है।
चिकित्सकों का कहना है कि समय पर उपचार मिलने के बावजूद शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी होने पर उल्टी-दस्त गंभीर रूप ले सकता है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक रहता है।
मेडिसिन विशेषज्ञ डा. योगेंद्र मल्होत्रा के अनुसार बारिश के मौसम में पीने के पानी को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। केवल पानी का साफ दिखाई देना ही उसके सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है।उन्होंने लोगों को उबला हुआ या फिल्टर किया पानी पीने की सलाह दी है। भोजन को ताजा और ढककर रखने के साथ खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना भी जरूरी है।
मेडिसिन विशेषज्ञ डा. आरएल खरे के मुताबिक लगातार उल्टी और दस्त से शरीर में पानी तथा इलेक्ट्रोलाइट तेजी से कम हो सकते हैं। ऐसे में ओआरएस का घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है।
यदि मरीज को लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों, चक्कर आ रहा हो, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, पेशाब कम हो रहा हो, मल में खून दिखाई दे या तेज बुखार बना हुआ हो, तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
मौसम में बदलाव का असर केवल पेट से जुड़ी बीमारियों तक सीमित नहीं है। सर्दी-खांसी, गले में खराश, बुखार और वायरल संक्रमण के मामले भी बढ़ रहे हैं।
वायरल के लक्षण होने पर पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेते रहें। घर में किसी व्यक्ति को संक्रमण होने पर अनावश्यक रूप से बहुत नजदीकी संपर्क से बचें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना भी जरूरी है।
डॉक्टरों ने बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं शुरू नहीं करने की सलाह दी है। हर बुखार या संक्रमण में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती और गलत दवा लेने से उपचार प्रभावित हो सकता है। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार या तेजी से बिगड़ती हालत जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय जांच कराना चाहिए।