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From TV to cinema, Ekta Kapoor is the face of India's favorite stories
भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एकता कपूर का नाम सिर्फ एक निर्माता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे क्रिएटिव फोर्स के रूप में लिया जाता है, जिसने दशकों तक दर्शकों की पसंद को समझा और उसे दिशा दी। ऐसे समय में जब ज़्यादातर प्रोड्यूसर किसी एक जॉनर या प्लेटफॉर्म तक सीमित रह जाते हैं, एकता कपूर ने टेलीविजन, सिनेमा और अलग-अलग विषयों में लगातार प्रयोग करते हुए लंबी सफलता हासिल की है।
फैमिली ड्रामा से बदली टीवी की परिभाषा
एकता कपूर ने भारतीय टेलीविजन को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि हर घर की दिनचर्या बना दिया। क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कसौटी ज़िंदगी की और कहानी घर घर की जैसे सीरियल्स ने न केवल टीआरपी के रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि किरदारों को घर-घर में पहचान दिलाई। इन शोज़ ने पारिवारिक रिश्तों, भावनाओं और संघर्षों को इस तरह पेश किया कि दर्शक उनसे खुद को जोड़ने लगे।
हॉरर और सुपरनैचुरल को मेनस्ट्रीम में जगह
जब हिंदी सिनेमा में हॉरर को सीमित दर्शकों का जॉनर माना जाता था, तब एकता कपूर ने कृष्णा कॉटेज और रागिनी एमएमएस जैसी फिल्मों के ज़रिए डर को कमर्शियल और एंटरटेनिंग तरीके से पेश किया। इन प्रोजेक्ट्स ने साबित किया कि सही ट्रीटमेंट के साथ हॉरर भी बॉक्स ऑफिस पर असर छोड़ सकता है।
रॉ गैंगस्टर और शहरी कहानियों की मजबूती
शूटआउट एट लोखंडवाला फ्रैंचाइज़ और शोर इन द सिटी जैसी फिल्मों के माध्यम से एकता कपूर ने रियलिज़्म से जुड़ी, हार्ड-हिटिंग शहरी कहानियों पर अपनी पकड़ दिखाई। ये फिल्में सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि उस दौर और समाज की सच्चाई को भी सामने लाती हैं।
मास ऑडियंस के लिए स्मार्ट कॉमेडी
ड्रीम गर्ल और ड्रीम गर्ल 2 जैसी फिल्मों में एकता कपूर की हाई-कॉन्सेप्ट और कैरेक्टर-ड्रिवन कॉमेडी की समझ साफ दिखती है। एक अनोखे आइडिया को उन्होंने ऐसी फ्रैंचाइज़ में बदला, जिसे दर्शकों ने खुले दिल से अपनाया।
कंटेंट-रिच और अवॉर्ड-विनिंग सिनेमा
द डर्टी पिक्चर, लुटेरा और उड़ता पंजाब जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि एकता कपूर सिर्फ कमर्शियल सफलता ही नहीं, बल्कि मजबूत, साहसी और विषय-प्रधान कहानियों पर भी भरोसा करती हैं। इन फिल्मों को समीक्षकों और अवॉर्ड्स दोनों का सम्मान मिला।
रोमांस और इमोशनल टकराव की संतुलित प्रस्तुति
एक विलेन जैसी इंटेंस फिल्म से लेकर बड़े अच्छे लगते हैं जैसे इमोशनल टीवी शोज़ तक, एकता कपूर ने प्यार, रिश्तों और टकराव को संवेदनशीलता के साथ पेश किया, जो दर्शकों के दिलों तक पहुंचा।
महिलाएं, दोस्ती और मॉडर्न सोच
वीरे दी वेडिंग और क्रू जैसी फिल्मों में उन्होंने महिलाओं की दोस्ती, सपनों और महत्वाकांक्षाओं को केंद्र में रखा। ये कहानियां नई पीढ़ी की महिलाओं से सीधे जुड़ती हैं और बदलते समाज की झलक देती हैं।
एक्सपेरिमेंटल सोशल सिनेमा में नई राह
लव सेक्स और धोखा जैसी फिल्म के ज़रिए एकता कपूर ने सोशल सिनेमा में नया प्रयोग किया। यह फिल्म आज के दौर में टेक्नोलॉजी, निजता और रिश्तों पर पड़ने वाले प्रभाव को बेबाकी से दिखाती है।
कुल मिलाकर, एकता कपूर की पहचान एक ऐसी निर्माता की है जो दर्शकों की नब्ज़ समझती हैं, जोखिम उठाती हैं और हर दौर के साथ खुद को नए सिरे से परिभाषित करती रहती हैं। यही वजह है कि टीवी हो या सिनेमा, भारत की पसंद की कहानियों में उनका नाम हमेशा खास रहेगा।