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Gearing up for the next major political move... the issue of women's reservation could heat up again in Parliament this September.
नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक एक बार फिर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में आता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए सितंबर के तीसरे सप्ताह के आसपास संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है।संभावित तौर पर 21 या 22 सितंबर के आसपास विशेष बैठक हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि महिला आरक्षण से जुड़ा मूल नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी 20 और 21 सितंबर 2023 को संसद से पारित हुआ था। ऐसे में सरकार इसी अवधि के आसपास नए विधेयक के जरिए 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दे सकती है।
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन में करीब दो वर्ष का समय लगने की संभावना को देखते हुए सरकार के सामने समयसीमा का दबाव है। यदि 2029 का लोकसभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराने की योजना है, तो संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया जल्द शुरू करनी होगी।सरकार के भीतर इसे लेकर दो विकल्पों पर चर्चा बताई जा रही है। एक पक्ष दिसंबर में प्रस्तावित शीतकालीन सत्र के दौरान विधेयक लाने के पक्ष में है, जबकि दूसरा पक्ष विशेष सत्र बुलाकर इसे जल्द पारित कराने को प्राथमिकता दे रहा है।
अप्रैल 2026 में भी महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई थी, लेकिन जरूरी दो-तिहाई समर्थन नहीं जुट पाने के कारण इसे पारित नहीं कराया जा सका। अब सरकार के वरिष्ठ सूत्रों का दावा है कि इस बार विधेयक के पक्ष में पर्याप्त समर्थन जुटाया जा सकता है।सरकारी आकलन के अनुसार लोकसभा में वर्तमान में 540 सदस्य हैं और संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 माना जा रहा है। एनडीए में भाजपा और सहयोगी दलों की संख्या 319 बताई जा रही है। इसके अलावा डीएमके के 22, वाईएसआर कांग्रेस के 4 और एनसीपी एसपी के 8 सदस्यों से सहयोग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कुछ चुनावी राज्यों के विपक्षी सांसदों के सदन में अनुपस्थित रहने की संभावना को भी सरकार के समर्थन गणित में शामिल किया जा रहा है।
संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 13 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। संसद की यह असामान्य स्थिति भी विशेष बैठक की संभावित योजना से जोड़कर देखी जा रही है।हालांकि, विशेष सत्र को लेकर अंतिम निर्णय और तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।
15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक दलों से महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में सहयोग की अपील की थी। उन्होंने सभी दलों से महिला आरक्षण को जल्द लागू करने और महिलाओं को देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने का आग्रह किया था।इस बयान के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की अटकलें तेज हुई हैं।
महिला आरक्षण को लेकर सरकार की संभावित रणनीति को केवल संवैधानिक सुधार के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे राजनीतिक गणित भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस लगातार महिला अधिकारों और महिला मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दे रही है।ऐसे में भाजपा नेतृत्व महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाकर इस मुद्दे पर राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर सकता है। भाजपा महामंत्री स्मृति ईरानी भी कांग्रेस से विधेयक पर सहयोग की अपील कर चुकी हैं। यदि सितंबर में विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो संसद के भीतर यह मुद्दा आगामी राजनीतिक रणनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है।