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The bigger picture regarding the advancement of youth emerges... NITI Aayog outlines new pathways to employment.
नई दिल्ली। भारत के सामने युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ने की चुनौती अब भी बड़ी है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं। इन्हें एनईईटी यानी नॉट इन एजुकेशन, एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग श्रेणी में रखा गया है।हालांकि, यह आंकड़ा 2021 के नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए इसे वर्ष 2026 में युवाओं की मौजूदा स्थिति का प्रत्यक्ष आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
नीति आयोग की 'रीइमैजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत 2047' रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की स्किलिंग व्यवस्था को केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार, आय और करियर में प्रगति से जोड़ना जरूरी है।रिपोर्ट में कम आय वाले युवाओं के लिए सब्सिडी वाले प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता जैसे उपायों की जरूरत भी बताई गई है, ताकि आर्थिक स्थिति उनकी कौशल और रोजगार तक पहुंच में बाधा न बने।
नीति आयोग ने युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया स्कूल स्तर से शुरू करने का सुझाव दिया है। कक्षा 6 से रोजगारपरक कौशल विकसित करने और कक्षा 9 से चुनिंदा स्कूलों में अलग 'स्किल ट्रैक' शुरू करने की सिफारिश की गई है।इसमें सामान्य रोजगार कौशल के साथ उद्यमिता और व्यावहारिक क्षमताओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि आगे की पढ़ाई और रोजगार की जरूरतों के लिए भी तैयार हों।
रिपोर्ट में उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को भी गंभीर मुद्दा बताया गया है। इसके अनुसार केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही ऐसी भूमिकाओं में कार्यरत हैं, जो उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप हैं।नीति आयोग ने व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल न होने को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया है। कई युवा डिग्री हासिल करने के बाद परिवार की आर्थिक जरूरतों के चलते अपनी योग्यता से कम स्तर का रोजगार स्वीकार कर लेते हैं।
रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह भी है कि एनईईटी श्रेणी में शामिल सभी युवाओं को बेरोजगार मानना उचित नहीं होगा। उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार इस समूह के करीब 38 प्रतिशत युवा घरेलू जिम्मेदारियों में लगे हुए हैं।इससे संकेत मिलता है कि युवाओं की आर्थिक गतिविधियों को समझने के लिए केवल नौकरी या बेरोजगारी के आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं। घरेलू काम, देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों और अन्य कारणों को भी विश्लेषण में शामिल करना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को विभिन्न माध्यमों से प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कौशल विकास के लिए करीब 34 हजार करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया गया है।नीति आयोग की सिफारिशों का व्यापक उद्देश्य यह है कि देश में कौशल विकास को प्रशिक्षण प्राप्त करने की प्रक्रिया से आगे ले जाकर वास्तविक रोजगार, बेहतर आय और दीर्घकालिक करियर अवसरों से जोड़ा जाए।