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Gen-Ji is running after tanning, experts expressed fear of increasing skin cancer
नई पीढ़ी यानी जेन-जी स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर जागरूक मानी जाती है, लेकिन त्वचा की सुरक्षा के मामले में तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में युवा स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के जोखिम को नजरअंदाज कर रहे हैं और आकर्षक दिखने की चाह में टैनिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे टैनिंग ट्रेंड और भ्रामक दावों ने युवाओं को गलत दिशा में प्रभावित किया है। कई युवा वैज्ञानिक तथ्यों को अनदेखा कर लंबे समय तक धूप में रहने या कृत्रिम टैनिंग का सहारा ले रहे हैं।
सर्वे में सामने आई चिंताजनक तस्वीर
हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के केवल 25 प्रतिशत युवाओं को भविष्य में स्किन कैंसर होने की चिंता है। जबकि सामान्य आबादी में यह आंकड़ा 39 प्रतिशत है।
सर्वे के दौरान लगभग 20 प्रतिशत युवाओं ने माना कि त्वचा कैंसर से बचाव की तुलना में टैनिंग उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण है। वहीं 25 प्रतिशत युवाओं का कहना था कि भविष्य में त्वचा को होने वाले नुकसान की चिंता करने के बजाय वर्तमान में आकर्षक दिखना ज्यादा जरूरी है।
भ्रम फैला रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
विशेषज्ञों के मुताबिक टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर सनस्क्रीन और त्वचा सुरक्षा को लेकर कई भ्रामक जानकारियां फैल रही हैं। कुछ पोस्ट में सनस्क्रीन को नुकसानदायक बताया जाता है, जबकि वैज्ञानिक शोध इसके विपरीत बताते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में युवा इन मिथकों पर भरोसा कर रहे हैं। परिणामस्वरूप वे त्वचा की सुरक्षा के जरूरी उपायों को नजरअंदाज कर रहे हैं और तेज धूप या टैनिंग बेड का उपयोग कर रहे हैं, जिससे त्वचा की कोशिकाओं और डीएनए को नुकसान पहुंच सकता है।
हर पांचवां व्यक्ति हो सकता है प्रभावित
विशेषज्ञों का कहना है कि स्किन कैंसर दुनिया के कई देशों में सबसे आम कैंसरों में शामिल है और समय रहते सावधानी बरतकर इससे काफी हद तक बचाव संभव है।
अध्ययनों के अनुसार, जीवनकाल में बार-बार सनबर्न होने से मेलानोमा जैसे खतरनाक त्वचा कैंसर का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। पांच या उससे अधिक बार गंभीर सनबर्न होने पर यह खतरा दोगुना तक हो सकता है।
क्यों नहीं मान रहे युवा चेतावनी?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अपने हमउम्र लोगों को टैनिंग के साथ आकर्षक दिखते देखकर युवाओं को इसके जोखिम कम लगते हैं। कई प्रभावशाली सोशल मीडिया चेहरे बिना वैज्ञानिक प्रमाण के सलाह देते हैं, जिससे भ्रम और बढ़ता है।
इसी कारण त्वचा सुरक्षा, सनस्क्रीन के उपयोग और धूप से बचाव संबंधी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह उतनी तेजी से लोगों तक नहीं पहुंच पाती, जितनी तेजी से भ्रामक जानकारियां वायरल हो जाती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए, बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए और त्वचा में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उनका मानना है कि सुंदर दिखने की चाह स्वाभाविक है, लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य से समझौता करना भविष्य में गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिए युवाओं को सोशल मीडिया ट्रेंड के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों और विशेषज्ञों की सलाह पर भरोसा करना चाहिए।