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Government Dental College locked down over demand for stipend, halting treatment; patients return without treatment
रायपुर | राजधानी रायपुर के एकमात्र शासकीय डेंटल कॉलेज में स्टाइपेंड की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों का आंदोलन सातवें दिन उग्र हो गया। छह दिन तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बाद गुरुवार को छात्रों ने कॉलेज के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया, जिससे ओपीडी समेत सभी तरह की इलाज सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। सुबह से ही दांत दर्द, सूजन, संक्रमण, सर्जरी और एक्सीडेंट के मामलों में आए मरीज कॉलेज परिसर में भटकते रहे और कई घंटों तक इंतजार के बाद बिना इलाज के लौट गए।
तालाबंदी के कारण सीनियर डॉक्टर और प्रोफेसर भी कॉलेज परिसर में ही बैठे रहे। छात्रों ने उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी। बुजुर्ग, महिलाएं और ग्रामीण इलाकों से आए मरीज सबसे ज्यादा परेशान नजर आए। कई मरीजों का कहना था कि वे दूर-दराज से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन हड़ताल की वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा।
सुबह करीब साढ़े आठ बजे से आंदोलनकारी छात्र कॉलेज गेट पर बैठे रहे। उन्हें समझाने के लिए डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) और एसडीएम मौके पर पहुंचे और बातचीत की कोशिश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मांगों पर शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है, लेकिन छात्रों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। बातचीत विफल होने के बाद दोपहर में पुलिस पहुंची और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को उठाकर तूता धरना स्थल ले जाया गया।
डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. वीरेंद्र वाढ़ेर ने बताया कि स्टाइपेंड से जुड़ा प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और अब इस पर निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।
डेंटल कॉलेज में रोजाना 500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बीते छह दिनों से चल रहे प्रदर्शन के कारण पहले ही मरीजों की संख्या कम हो गई थी, लेकिन गुरुवार की तालाबंदी से इलाज पूरी तरह ठप हो गया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने इमरजेंसी मामलों के लिए एक टेबल लगाकर सीमित मरीजों को देखा, इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज बिना इलाज के लौटते रहे। किसी को दांत का एक्स-रे कराना था, किसी को दांत लगवाना था, तो किसी को जबड़े की सर्जरी या एक्सीडेंट के बाद इलाज की जरूरत थी।
धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र के चारभाठा गांव से आए एक बुजुर्ग मरीज ने बताया कि एक दुर्घटना में उनका जबड़ा टूट गया है और मेकाहारा अस्पताल से उन्हें डेंटल कॉलेज रेफर किया गया था, लेकिन तालाबंदी के कारण उन्हें बाहर ही भटकना पड़ा। वहीं कैंसर के इलाज के फॉलोअप के लिए अंबिकापुर से आए एक अन्य बुजुर्ग मरीज ने बताया कि हड़ताल के चलते डॉक्टरों ने उन्हें अगले सप्ताह आने को कहा, जिसके बाद वे बिना इलाज वापस लौट गए।
हड़ताल पर बैठे पीजी और इंटर्न छात्रों की प्रमुख मांग स्टाइपेंड में समानता और गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा है। छात्रों का कहना है कि डेंटल इंटर्न को 12,600 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है, जबकि मेडिकल और आयुर्वेद इंटर्न को 15,900 रुपए दिए जाते हैं। इसी तरह डेंटल पीजी छात्रों को मेडिकल और आयुर्वेद पीजी की तुलना में काफी कम स्टाइपेंड मिलता है, जबकि काम और जिम्मेदारियां समान हैं। छात्रों का कहना है कि इसी असमानता के विरोध में वे आंदोलन कर रहे हैं।