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Government cracks down on MGNREGA fraud; ISRO technology to enable digital monitoring of workers and development projects.
नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली मनरेगा योजना में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। अब केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान नहीं होगा, बल्कि मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी और विकास कार्यों की जमीनी स्थिति की भी डिजिटल तरीके से पुष्टि की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सरकार ने मनरेगा में श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली लागू की है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिस व्यक्ति के नाम पर भुगतान किया जा रहा है, वही वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद है। फोटो आधारित सत्यापन से फर्जी उपस्थिति और दूसरे व्यक्ति के नाम पर हाजिरी लगाने जैसी गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लग रही है।
मनरेगा के तहत बनने वाले तालाब, सड़क, जल संरक्षण संरचनाएं और अन्य परिसंपत्तियों की निगरानी अब जियो टैगिंग के माध्यम से की जा रही है। इससे यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि जिस कार्य के लिए सरकारी राशि खर्च हुई है, वह वास्तव में जमीन पर पूरा हुआ है या नहीं।
कामों की निगरानी में इसरो का नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर सहयोग कर रहा है। इसरो के 'भुवन' प्लेटफॉर्म पर उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों और भौगोलिक आंकड़ों के आधार पर विकास कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। जुलाई से शुरू की गई 'भूग्राम' ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए विभिन्न परिसंपत्तियों और निर्माणाधीन कार्यों का विवरण डिजिटल नक्शों पर दर्ज किया जा रहा है।
सरकार ने 'युक्तधारा' प्लेटफॉर्म को भी इस व्यवस्था से जोड़ा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि किसी स्थान पर पहले से कोई सड़क, तालाब या अन्य विकास कार्य मौजूद है, तो उसकी जानकारी पहले से सिस्टम में दर्ज रहेगी। इससे एक ही परियोजना को अलग-अलग योजनाओं में दिखाकर दोबारा भुगतान लेने जैसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी।
सरकार ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को एकीकृत किया है। इसके माध्यम से अधिकारियों को यह जानकारी वास्तविक समय में मिल रही है कि किस स्थान पर कौन-सा कार्य चल रहा है, उसकी प्रगति कितनी है और सरकारी राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि फेस ऑथेंटिकेशन, जियो टैगिंग और उपग्रह आधारित निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद मनरेगा में पारदर्शिता बढ़ी है और फर्जी भुगतान तथा कागजी विकास कार्यों जैसी शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आई है। नई तकनीक से योजना के लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने में भी मदद मिल रही है।