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Government keeping a close watch on the growing challenges at the forest-village interface... Key measures to be taken—ranging from safeguarding the interests of forest dwellers to ensuring wildlife protection: Minister Kedar Kashyap.
रायपुर। वन विभाग की अहम बैठक में वनवासियों की सुरक्षा, तेंदूपत्ता कारोबार में पारदर्शिता और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वनवासियों का हित और उनकी सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है।
नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में मंगलवार को वनोपज राजकीय व्यापार अंतर्विभागीय समिति की 322वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में वर्ष 2026 में संग्रहित और गोदामीकृत तेंदूपत्तों की बिक्री के लिए दूसरे चरण की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।इसके साथ ही वर्ष 2025 सीजन में क्रेता करार समाप्त हो चुके तेंदूपत्ता लॉट की बिक्री के लिए प्राप्त निविदाओं पर भी विचार किया गया। मंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता व्यापार में पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णयों से संग्रहकों को बेहतर लाभ मिल सकेगा।
बैठक के दौरान कांकेर जिले और आसपास के वन क्षेत्रों में भालुओं की बढ़ती आवाजाही का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। ग्रामीण इलाकों में भालुओं की मौजूदगी से मानव-वन्यजीव संघर्ष और जनहानि का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए इस पर गंभीरता से चर्चा की गई।
वन मंत्री ने अधिकारियों को भालू के हमलों और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में भालुओं की गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं, वहां वन विभाग को निगरानी मजबूत करनी होगी।ग्रामीणों को भी समय रहते वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी देने की व्यवस्था पर जोर दिया गया, ताकि संभावित घटनाओं को टाला जा सके।
सरकार के सामने चुनौती वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ वन्यजीवों का संरक्षण बनाए रखने की भी है। ऐसे में निगरानी, समय पर सूचना और स्थानीय स्तर पर जागरूकता को मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।