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Government places major focus on road accidents in Chhattisgarh... CM Sai issues directives to work in 'mission mode' to bring the death toll down to zero.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर राज्य सरकार ने अब व्यापक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य या न्यूनतम स्तर तक लाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं होना चाहिए। सड़क हादसे में संभावित हर जनहानि को रोकना प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए हादसा होने से पहले सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के साथ दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को जल्द उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रभावी बनानी होगी।
मुख्यमंत्री ने जीरो फेटेलिटी के लक्ष्य को लेकर परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और नगरीय निकाय विभागों को संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से सड़क सुरक्षा के हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करने को कहा।बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से समीक्षा की गई। वाहनों की फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस, ब्लैक स्पॉट, सड़क कनेक्टिविटी और दुर्घटना के बाद तत्काल सहायता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 23 ब्लैक स्पॉट को सुधारने की कार्रवाई फिलहाल प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने इन सभी स्थानों पर काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जोखिम कम किया जा सके।उन्होंने वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और एचएसआरपी अभियान में तेजी लाने पर भी जोर दिया। लंबित चालानों की वसूली के साथ ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन और ई ट्रैक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।
मुख्यमंत्री ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए, ताकि निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले योग्य चालकों को ही लाइसेंस मिल सके।वाहनों की फिटनेस जांच को मजबूत करने के साथ सड़क सुरक्षा नियमों के पालन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों की तत्काल मदद से जुड़ी योजनाओं के व्यापक प्रचार पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि पीएम राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है।इसके अलावा राहवीर योजना के जरिए दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर सहायता करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि जरूरत के समय अधिक से अधिक पीड़ितों को मदद मिल सके।
बैठक में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के विस्तार को लेकर भी निर्देश दिए गए। उन्होंने दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर बस सेवा से जोड़ने को कहा।मुख्यमंत्री ने कॉटा से जगरगुंडा के बीच मुख्यमंत्री बस सेवा का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां पहले करीब छह घंटे का सफर करना पड़ता था, वहां अब यात्रा का समय लगभग 45 मिनट रह गया है। उन्होंने ऐसे ही अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में भी परिवहन सुविधा के विस्तार पर जोर दिया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024 के दौरान 14,857 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 15,318 हो गई। यानी एक साल के भीतर सड़क हादसों में 461 मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।इन आंकड़ों को देखते हुए सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी, वाहन जांच, सड़क सुधार और आपातकालीन चिकित्सा सहायता जैसी व्यवस्थाओं को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी विकसित करने के निर्देश दिए। उनका कहना है कि इससे पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को प्रोत्साहित करने पर भी बैठक में जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य सड़क सुरक्षा के साथ परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और टिकाऊ बनाना है।