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Green or red dots now mandatory on toiletry packets, including soap and shampoo; find out what changes to expect.
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साबुन, शैंपू, कॉस्मेटिक्स और अन्य पर्सनल केयर उत्पादों की पैकेजिंग को लेकर अहम बदलाव किया है। अब इन उत्पादों के पैकेट पर हरा या लाल/भूरा बिंदु लगाना अनिवार्य होगा। इस निशान के जरिए उपभोक्ता आसानी से जान सकेंगे कि उत्पाद में इस्तेमाल की गई सामग्री शाकाहारी मूल की है या पशु मूल की।
सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 में संशोधन किया है। 21 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नया प्रावधान प्रभावी हो गया। इसके तहत पर्सनल केयर उत्पादों की पैकेजिंग पर संबंधित पहचान चिह्न स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
नया प्रावधान पुराने नियम 6(8) की जगह नियम 6(4ए)(डी) में शामिल किया गया है। यानी लेबलिंग से जुड़ी शर्त को नियमों के नए कानूनी ढांचे में स्थानांतरित किया गया है।
नियम के अनुसार यह पहचान चिह्न पैकेट के मुख्य डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से में लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता को उत्पाद खरीदते समय उसकी सामग्री के मूल के बारे में आसानी से जानकारी मिल सके।
साबुन, शैंपू और कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल होने वाली कई सामग्री पौधों से प्राप्त होती हैं। उदाहरण के लिए नारियल, जैतून, एलोवेरा और शीया बटर पौधों से मिलते हैं।
वहीं लैनोलिन भेड़ की ऊन से प्राप्त होता है, जबकि कोलेजन और जिलेटिन पशु स्रोतों से मिलते हैं। इसके अलावा ग्लिसरीन, स्टीयरिक एसिड और फैटी एसिड जैसी कुछ सामग्री पौधों के साथ-साथ पशु वसा से भी तैयार की जा सकती हैं।
कई कॉस्मेटिक और टॉयलेटरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के नाम से यह स्पष्ट नहीं होता कि उनका स्रोत क्या है। ऐसे में पैकेट पर दिया गया हरा या लाल/भूरा बिंदु उपभोक्ताओं को उत्पाद की मूल प्रकृति समझने में मदद करेगा।
कुछ छोटे पैक पर सभी घटकों की पूरी जानकारी देना संभव नहीं होता। 60 मिलीलीटर तक के तरल और 30 ग्राम तक के ठोस पैक में घटकों की जानकारी से जुड़ी सीमाएं होती हैं। ऐसे उत्पादों में भी पहचान चिह्न उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने का काम करेगा।
टॉयलेटरीज और अन्य पैकेज्ड उत्पादों पर पहले से ही उत्पाद का नाम, निर्माता का पता, मात्रा, बैच नंबर, लाइसेंस नंबर, निर्माण एवं एक्सपायरी तारीख, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और इस्तेमाल संबंधी सावधानियां जैसी जानकारियां देना जरूरी है। नए प्रावधान के बाद उत्पाद की सामग्री के मूल से जुड़ी पहचान भी पैकेजिंग का हिस्सा होगी।