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बिलासपुर। विधि एवं विधायी विभाग ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम, 2006 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति, अनुभव और आरक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है, जो हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद लागू की गई है।
नए नियमों के तहत ज्यूडिशियल सर्विस में पदोन्नति के मानदंडों को पहले की तुलना में अधिक सख्त किया गया है। संशोधन के अनुसार अब सिविल जज (जूनियर एवं सीनियर कैटेगरी) को पदोन्नति के लिए न्यूनतम सात वर्ष की सेवा अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। वहीं, किसी पद पर बने रहने की न्यूनतम अवधि को पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है।
हायर ज्यूडिशियल सर्विस में भर्ती कोटा की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां भर्ती में 65 प्रतिशत और 10 प्रतिशत का प्रावधान था, अब उसे संशोधित कर क्रमशः 50 प्रतिशत और 25 प्रतिशत कर दिया गया है।
इसके साथ ही दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण का नया प्रावधान भी जोड़ा गया है। संशोधित नियमों के तहत दिव्यांगों के लिए कुल चार प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें दृष्टिबाधित एवं अल्प दृष्टि के लिए एक प्रतिशत, श्रवण बाधित (बधिर को छोड़कर) के लिए एक प्रतिशत तथा चलने में अक्षमता, कुष्ठ रोग मुक्त, बौनापन, तेजाब हमला पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से ग्रसित अभ्यर्थियों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण शामिल है। इसके अलावा आप्टिज्म और बहुदिव्यांगता श्रेणी के लिए भी एक प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है।
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी भर्ती वर्ष में दिव्यांग अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो संबंधित पद अगले भर्ती वर्ष में आगे बढ़ाए जाएंगे।
योग्यता मानदंडों में भी बदलाव किया गया है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक 60 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। सफल अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर 1:3 के अनुपात में साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाएगा।